बिहार में प्राइवेट स्कूल खोलना होगा आसान, जमीन और एनओसी के नियमों में मिलेगी ढील

Neelam
By Neelam
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बिहार में शिक्षा के क्षेत्र को अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक अहम बदलाव की तैयारी में है। अब राज्य में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियमों में ढील दी जाएगी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए सरकार अब शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण को छूट देने वाली है।

सरकार खुद करेगी मदद

नए नियमों के बाद प्रदेश में प्राइवेट स्कूल खोलने में सरकार खुद मदद करेगी। इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरकार चाहती है कि प्राइवेट सेक्टर के लोग शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करें, ताकि राज्य के बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए ज्यादा विकल्प मिल सकें। इसके लिए स्कूल खोलने के लिए निर्धारित भूमि और संसाधनों से जुड़ी शर्तों में संशोधन किया जाएगा।

बच्चों को अधिक से अधिक शैक्षणिक विकल्प मिलेंगे

शिक्षा विभाग का मानना है कि जमीन और अन्य संसाधनों की कड़ी शर्तों के कारण कई निवेशक पीछे हट जाते हैं। अब नियमावली में बदलाव होने से कम जमीन पर भी गुणवत्तापूर्ण स्कूल खोलने का रास्ता साफ होगा। सरकार का कहना है कि शिक्षा में प्राइवेट सेक्टर को प्रोत्साहित करने से राज्य के बच्चों को अधिक से अधिक शैक्षणिक विकल्प मिल सकेंगे। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। 

कड़े नियमों के कारण स्कूल खोलना मुश्किल

बिहार में फिलहाल कई कड़े नियमों के कारण स्कूल खोलना मुश्किल होता है। वर्तमान समय में सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए कम-से-कम एक एकड़ जमीन जरूरी है। वहीं ICSE स्कूल के लिए 50 डिसमिल भूमि अनिवार्य है। इसके साथ ही एनओसी लेना भी एक जटिल प्रक्रिया है। हर तीन साल पर एनओसी रिन्यू कराना भी जरूरी होता है। इन शर्तों के कारण कई लोग स्कूल नहीं खोल पाते।

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