बंगाल में ‘अग्निपरीक्षा’: चुनाव आयोग के सामने विपक्ष ने खोला शिकायतों का पिटारा

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय चुनाव आयोग की फुल बेंच के सामने विपक्षी दलों ने अपनी शिकायतों का पुलिंदा खोल दिया है। सोमवार को हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान कांग्रेस और माकपा ने सुरक्षा और आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े करते हुए साफ किया कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

कांग्रेस की दो-टूक:’चरणों की गिनती नहीं, वोटरों की सुरक्षा मायने रखती है’
बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने मीडिया से बात करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के लिए यह मुद्दा गौण है कि चुनाव कितने चरणों में संपन्न होते हैं।

प्राथमिकता: मतदाताओं की सुरक्षा और भयमुक्त वातावरण।

मांग: मतदान प्रक्रिया पूरी तरह हिंसा मुक्त हो।

बयान: भट्टाचार्य ने कहा, ‘लोकतंत्र का उत्सव तब तक संभव नहीं है जब तक बंगाल का आम वोटर डरा हुआ है। आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मतदाता बिना किसी दबाव के बूथ तक पहुंच सके।’

माकपा का तीखा प्रहार: ‘एसआइआर’ और ‘शत्रु’ की तरह बर्ताव पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, माकपा राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने चुनाव आयोग की भूमिका पर ही सवाल उठा दिए। माकपा ने राज्य में कम से कम चरणों (एक या दो) में चुनाव कराने की मांग की, लेकिन उनका सबसे कड़ा रुख ‘एसआइआर’ (SIR) के मुद्दे पर रहा।

आयोग पर आरोप: सलीम ने पूछा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में आम जनता को ‘शत्रु’ की तरह क्यों देखा जा रहा है?

सख्त टिप्पणी: उन्होंने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए यहाँ तक कह दिया कि आयोग अब अपनी निष्पक्षता खोकर ‘उत्पीड़न आयोग’ बनता जा रहा है।

मुद्दा: माकपा का आरोप है कि वेरिफिकेशन और सूची की जांच के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है।

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