मिरर मीडिया : बीपीएल कोटे में नामांकन के लिए पैसे की मांग को लेकर पुलीस लाइन के पास रहने वाले उज्जवल कुमार सेन ने जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के कर्मी मनोज कुमार रवानी और ड्राइवर पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बताया कि वह आलू विक्रेता है पुत्री का बीपीएल कोटे के तहत दाखिला को लेकर मनोज कुमार रवानी को 23 हज़ार रुपए दिए थे बावजूद नामांकन नहीं हुआ और अब जिला शिक्षा अधीक्षक के पास गुहार लगा रहे हैं।

जबकि इस मामले में वहीं के कर्मी ने बताया की लिफाफा में दिया गया था जो कि जिला शिक्षा अधीक्षक के ड्राइवर को दे दिया गया उसमें कितना पैसा था, क्या था उनको मालूम नहीं।

वहीं पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधीक्षक भूतनाथ रजवार ने बताया कि उक्त अभिभावक की पुत्री का बीपीएल कोटा के तहत् नामांकन हो गया है पैसे लेने के आरोप गलत है जहां तक मनोज रवानी की बात है तो उसका यहां से तबादला हो गया है।
बता दे की बीपीएल कोटा के तहत नामांकन के लिए पैसे लेनदेन के लगातार आरोप लगते रहते हैं हाल ही में झारखंड अभिभावक महासंघ और भाजपा नेत्री ने पैसे लेने का आरोप लगाए थे पूरे मामले पर राज्य बाल संरक्षण आयोग ने संज्ञान लेते हुए जांच की थी और नामांकन को रोक दिया गया था।
जांच में पैसे लेने सहित कई अनियमितताएं आयोग की टीम को मिली थी जिसके बाद नए सिरे से आवेदनों की जांच शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में बीपीएल कोटे के तहत अधिकांश बच्चों का नामांकन ले लिया गया और जिन आवेदनों में त्रुटि थी उसे रोक दिया गया।

वहीं अभिभावक उज्जवल कुमार सेन द्वारा लगाया गए आरोप कुछ दिन पूर्व का है मामला जिला शिक्षा अधीक्षक के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभिभावक की पुत्री का नामांकन हेतु पत्र जारी कर दिए जबकि अभिभावक उज्ज्वल सेन ने बताया कि मनोज रवानी दो-तीन महीने पहले पैसे लिए थे। यानी की कुल मिलाकर अभी भी गैंग सक्रिय है और अभिभावकों को चूना लगाने में पीछे नहीं हट रहा है पूरे मामले कि तह तक जांच होनी चाहिए और पैसे मांगने वालों के खिलाफ अभिभावकों को भी खुलकर सामने आने की जरूरत है तभी इनके नेक्सस को तोड़ा जा सकेगा।

