चिराग पासवान को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं पशुपति पारस, क्या एक होने जा रहे चाचा-भतीजा ?

Neelam
By Neelam
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राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के प्रमुख पशुपति कुमार पारस अपने भतीजे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के सामने पस्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने भतीजे से अदावत को साइड में रखते हुए बड़ा बयान दिया है। पारस ने कहा कि अगर चिराग बिहार के मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें खुशी होगी।

पशुपति पारस चाहते हैं पार्टी और परिवार एक हो जाए

राविलास पासवान की पार्टी (लोक जनशक्ति पार्टी) में फूट के बाद चाचा (पशुपति पारस) और भतीजा (चिराग पासवान) अलग-अलग हो गए थे। परिवार भी टूट गया था। हालांकि, हाल के दिनों में दोनों के मिलने के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वह दिल से चाहते हैं कि पार्टी और परिवार एक हो जाए।

चिराग का चाचा का समर्थन

बिहार में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर पारस ने कहा कि यह फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही तय करेंगे कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या चिराग पासवान भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं, तो पारस ने साफ तौर पर कहा, “हम चाहते हैं कि वह मुख्यमंत्री बनें।”

पासवान परिवार में सुलह के संकेत

पशुवति पारस का ये बयान उस वक्त आया है हाल ही में जब एक कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने अपने चाचा पशुपति पारस के पैर छुए, जिसके बाद पारस ने उन्हें गले लगाकर आशीर्वाद दिया। पशुपति पारस के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर परिवार में सुलह के संकेत मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चिराग पासवान की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रामविलास पासवान के निधन के बाद राजनीतिक विरासत को लेकर टूट

दरअसल, लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रहे रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी में राजनीतिक विरासत को लेकर टूट हो गई थी। रामविलास के बेटे चिराग और भाई पशुपति पारस ने अलग-अलग गुट बना लिए थे। उस समय लोजपा के कुल 6 सांसद थे। चिराग को छोड़ सभी सांसद पारस के समर्थन में आ गए थे और पशुपति पारस अपने भाई रामविलास की जगह केंद्र में मंत्री बने थे। चिराग एनडीए से अलग हो गए थे।

लोजपा के दोनों गुटों के एक होने के संकेत

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग पासवान की एनडीए में वापसी हुई। पारस ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। एनडीए में पारस के गुट वाली पार्टी रालोजपा को साइडलाइन कर दिया गया। पिछले लोकसभा चुनाव में चिराग के गुट वाली लोजपा (रामविलास) को 5 सीटें दी गईं, जबकि रालोजपा खाली हाथ रही। बाद में पशुपति पारस ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव रालोजपा ने गठबंधन से अलग रहकर लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। अब पारस अपनी पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने में लगे हैं। इस बीच उन्होंने इच्छा जाहिर कर दी है कि लोजपा के दोनों गुट वापस एक हो जाएं। 

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