लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा अब बस आने ही वाला है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में श्रद्धालु इसकी तैयारियों में पूरे भक्ति-भाव से जुट चुके हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर देशवासियों से इस पर्व की परंपरा और पवित्रता से जुड़ने का आग्रह किया है।
🪔 पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने X पोस्ट में लिखा —
“प्रकृति और संस्कृति को समर्पित महापर्व छठ आने वाला है। बिहार सहित देशभर में इसकी तैयारियों में श्रद्धालु पूरे भक्ति-भाव से जुट चुके हैं। छठी मइया के गीत इस पावन अवसर की भव्यता और दिव्यता को और बढ़ाने वाले होते हैं। आपसे आग्रह है कि आप भी छठ पूजा से जुड़े गीत मेरे साथ शेयर करें। मैं अगले कुछ दिनों तक इन्हें सभी देशवासियों के साथ साझा करूंगा।”
प्रधानमंत्री का यह संदेश छठ पर्व की लोक संस्कृति और भारतीय परंपरा के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने देशवासियों से इस पर्व के लोकगीतों और सांस्कृतिक भावनाओं को साझा करने का आग्रह किया, ताकि भारत की लोक विरासत और भक्ति परंपरा को और बल मिले।
🌿 25 अक्टूबर से शुरू होगा छठ महापर्व
इस वर्ष छठ पूजा 25 अक्टूबर 2025 (शनिवार) से शुरू होकर 28 अक्टूबर (मंगलवार) तक चलेगा। यह चार दिवसीय पर्व लोक जीवन, शुद्धता, संयम और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
छठ पूजा 2025 की प्रमुख तिथियां:
25 अक्टूबर: नहाय-खाय
26 अक्टूबर: खरना
27 अक्टूबर: संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को)
28 अक्टूबर: उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को)
☀️ सूर्य देव और छठी मैया की आराधना
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित पर्व है। व्रती महिलाएं चार दिनों तक शुद्धता और सात्विकता का पालन करती हैं।
नहाय-खाय: स्नान, शुद्धता और सात्विक भोजन से शुरुआत
खरना: गुड़ की खीर और घी की रोटी का प्रसाद
संध्या अर्घ्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य
उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन
🌸 छठ पूजा का महत्व
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि प्रकृति, स्वच्छता और पारिवारिक एकता का संदेश भी देता है। सूर्य देव की उपासना से ऊर्जा और आरोग्य प्राप्त होता है, जबकि छठी मैया को संतान रक्षा और मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी माना गया है।
🇮🇳 लोक संस्कृति और एकता का पर्व
प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोग पारंपरिक छठ गीत और लोकधुनें साझा कर रहे हैं। घाटों की सफाई, पूजा की तैयारी और गीतों की गूंज से पूरे उत्तर भारत में भक्ति और लोकसंस्कृति का माहौल बन गया है।

