मिरर मीडिया विशेष ::::
जमशेदपुर। लौहनगरी में दुर्गा पूजा को लेकर एक अलग ही उत्साह होता है। रास गरबा और डांडिया जैसी आयोजनों से रातें सजने लगती है। गुजरात के रंग-बिरंगे परिधान और आभूषण लोगों के आकर्षण का भी एक मुख्य कारण बनती है। लोग भले ही गरबा डांडिया में हिस्सा ना हो लेकिन इसके रंग में रंगने के लिए और इस का लुफ्त उठाने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक भी बड़े-बड़े होटलों और क्लबों में पहुंचते हैं। लेकिन पिछले 2 सालों से दुर्गा पूजा में डांडिया, गरबा के आयोजन पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। ऐसे में व्यापारियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारी वर्ग डांडिया और रास गरबा के आयोजन के लिए गुजरात से थोक में माल( कपड़े और ज्वेलरी) उठाते हैं और उन्हें रेंट पर देते हैं।इसके अलावा स्कूल कॉलेजों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में फैंसी ड्रेस मॉडलिंग इत्यादि के लिए भी कई आर्डर रेंट पर लेने के लिए आते हैं लेकिन पिछले डेढ़ सालों से स्कूल कॉलेज बंद है जिस कारण कोई भी कार्यक्रम भी नहीं हो पा रही है। वहीं किसी सामूहिक कार्यक्रम के आयोजन पर भी पूरी तरह रोक है , जिस कारण इन व्यापारियों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। कपड़ों को रेंट पर लेने के लिए आर्डर नहीं आने से इनके इनकम का सोर्स बंद हो गया है। इन कपड़ों के रख रखाव का भी खर्च उन्हें उठाना पड़ता है। कपड़ों का रखरखाव और ड्राई क्लीनिंग इत्यादि करना पड़ता है। सही से रखरखाव नहीं होने पर कपड़ों के खराब होने और धब्बे पड़ने का डर रहता है। व्यापारियों का कहना है कि पिछले 2 साल से इनके मेंटेनेंस का भी खर्च नहीं निकल पा रहा है। कुछ डाउन पेमेंट करने के बाद कपड़े थोक में उठाते हैं उसके बाद उसके इनकम से किस्त में पैसे भरे जाते हैं। वही कपड़ों को रेंट में देकर सिर्फ त्योहारों के सीजन में ही कमाई होती है सालों भर इसकी कमाई नहीं होती। ऐसे में 2 सालों से त्यौहार का सीजन यूं ही निकल रहा है।