डिजिटल डेस्क। रांची: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज रांची रेलवे स्टेशन एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। यहां से ईरगा के लिए रवाना हुई एक विशेष ट्रेन ने यह साबित कर दिया कि पटरियों पर दौड़ती लोहारूपी चुनौती हो या यात्रियों की सुरक्षा, महिलाएं हर मोर्चे पर ‘ऑलराउंडर’ हैं। इस खास ट्रेन की पूरी कमान इंजन से लेकर आखिरी डिब्बे तक सिर्फ और सिर्फ महिला रेल कर्मियों ने संभाली।

25 महिला जांबाज, एक मिशन
इस विशेष पहल के तहत रांची रेल मंडल ने कुल 25 महिला कर्मचारियों की एक टीम तैयार की थी। इन महिलाओं ने अलग-अलग भूमिकाओं में ट्रेन का सफल संचालन सुनिश्चित किया।
स्टेयरिंग पर दीपाली: लोको पायलट दीपाली ने जैसे ही ट्रेन का लीवर खींचा, प्लेटफॉर्म नंबर 1A तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी सूझबूझ से ट्रेन अपने गंतव्य की ओर रवाना हुई।
सुरक्षा का जिम्मा: ट्रेन के भीतर यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रीता कुमारी ने संभाली, जो पूरे सफर के दौरान मुस्तैद दिखीं।
मैनेजमेंट और चेकिंग: ट्रेन मैनेजर से लेकर टिकट जांच (TTE) तक की टीम में केवल महिलाएं तैनात थीं, जो यात्रियों की मदद और जांच करती नजर आईं।
फूलों से हुआ स्वागत, बढ़ा उत्साह
ट्रेन के रवाना होने से पहले रांची मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) शुचि सिंह ने सभी महिला कर्मियों को गुलाब का फूल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं की क्षमता पर भरोसे और उनके योगदान को सलाम करने का एक तरीका है।
बता दें कि रांची रेलवे स्टेशन पर यह परंपरा हर साल निभाई जाती है, ताकि हम समाज को दिखा सकें कि महिलाएं अब सिर्फ सहायक नहीं, बल्कि रेलवे संचालन की मुख्य कड़ी हैं।
क्यों खास है यह पहल?
रांची रेल मंडल द्वारा हर साल महिला दिवस पर इस तरह का आयोजन किया जाता है। यह न केवल महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश करता है, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रेलवे जैसे चुनौतीपूर्ण करियर को चुनने के लिए प्रेरित करता है। संचालन से लेकर सुरक्षा तक की कमान संभालकर इन 25 महिलाओं ने आज ‘नारी शक्ति’ की नई परिभाषा लिखी है।

