अरका जैन यूनिवर्सिटी के 2021 सत्र के पीएचडी शोधार्थियों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आरम्भ 2021 का आभासी मंच के माध्यम से आयोजित हुआ। जिसमें विश्वविद्यालय के सभी नव-पंजीकृत शोधार्थियों को मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर कोआपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य प्रो (डॉ) अमर सिंह ने सम्बोधित किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो (डॉ) एसएस रज़ी, निदेशक अमित श्रीवास्तव व डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ अंगद तिवारी ने भी शोधार्थियों को सम्बोधित किया। विदित हो कि उक्त ओरिएंटेशन कॉमर्स, मैनेजमेंट, इंग्लिश, व पत्रकारिता व जनसंचार विभाग के शोधार्थियों के लिए था। रिसर्च सेल के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ सोनिया रियात ने सभी का औपचारिक स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का शोध प्रकोष्ठ अच्छे शोधों के साथ शोधार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए भी कृतसंकल्प है। मुख्य अतिथि प्रो (डॉ) अमर सिंह ने शोध की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शोध मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है तथा ज्ञान भण्डार को विकसित एवं परिमार्जित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि शोध पूर्वाग्रहों के निदान और निवारण में सहायक है। शोध अनेक नवीन कार्यविधियों व उत्पादों को विकसित करता है। उन्होंने शोधार्थियों को मनोयोग के साथ शोधकार्य करने की अपील की। उन्होंने नए शोधार्थियों को बधाई देते हुए आशा की कि उनके शोध पूर्वाग्रहों के निदान और निवारण में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने पीएचडी गाइडलाइन्स का भी विस्तार से चर्चा की। कुलपति प्रो एस एस रज़ी ने कहा कि शोध ज्ञान के लिए ज्ञान का फव्वारा है और ऐसे में शोधार्थियों को ईमानदारी बरतनी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय में शोधोपयोगी स्टडी मटेरियल एवं इनफ्लिबनेट की सुविधा रहने की बात कही। निदेशक अमित श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शोधार्थियों का हर संभव सहयोग करने के लिए कटिबद्ध है और उन्होंने रचनात्मक विकास के लिए शोधार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। डॉ अंगद तिवारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि शोध मानव ज्ञान को दिशा प्रदान करता है और इसलिए शोधार्थियों को सही दृष्टि रखनी चाहिए ताकि सूक्ष्म अध्ययन किया जा सके। एमबीए के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ चारु वाधवा ने शोध कार्य के सम्बन्ध में अपना वक्तव्य में कहा कि शोध कठिन परिश्रम और लगन मांगता है ताकि अभीष्ट परिणाम प्राप्त किया जा सके। उन्होंने शोधार्थियों को अपने क्षेत्र के अद्यतन प्रगति पर नज़र रखने की सलाह दी। अंग्रेजी विभाग के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो राजकुमारी घोष ने विश्वविद्यालय के शोध निर्देशकों की विस्तृत जानकारी दी। नव-पंजीकृत शोधार्थियों के बीच विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के पूर्व पंजीकृत शोधार्थियों ने अपने अनुभव साझा किये। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक समेत सभी शोध निर्देशक, संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष सम्मिलित थे।

