RG Kar Case: 147 में से सिर्फ 7 गवाह… और सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष को दे दी जमानत

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : आरजी कर मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले में धीमी सुनवाई और लंबी कैद का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दे दी है। हालांकि, कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही उनकी जेल से रिहाई तय होगी।

धीमी सुनवाई बनी आधार: 147 में से अब तक सिर्फ 7 गवाहों के बयान दर्ज होने और 2 साल से अधिक समय से जेल में बंद होने को कोर्ट ने आधार बनाया।

हाई कोर्ट का आदेश पलटा: कलकत्ता हाई कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका जताते हुए जमानत खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ संदीप घोष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

दुष्कर्म-हत्या मामले में पहले मिल चुकी है जमानत: ट्रेनी डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में उन्हें पहले ही राहत मिल चुकी थी, लेकिन वित्तीय अनियमितताओं के कारण वे अब तक हिरासत में थे।

लंबी कैद और धीमी रफ्तार बनी रिहाई की वजह
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान संदीप घोष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में कुल 147 गवाह हैं, लेकिन दो साल से ज्यादा का वक्त बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 7 गवाहों की ही गवाही पूरी हो पाई है। अदालत ने सुनवाई की इस सुस्त रफ्तार और अभियुक्त की लंबी हिरासत को गंभीरता से लेते हुए जमानत मंजूर कर ली।

इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने सरकारी धन के कथित गबन और आरोपी के प्रभावशाली होने के चलते गवाहों पर दबाव या प्रभाव डालने की आशंका जताते हुए उनकी जमानत अर्जी ठुकरा दी थी। जिसके बाद 18 अगस्त को संदीप घोष ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

क्या था पूरा मामला और सीबीआई-ईडी की जांच?
आरजी कर अस्पताल में वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने संदीप घोष को गिरफ्तार किया था। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले की जांच अपने हाथ में ली।

ईडी के मुताबिक, अस्पताल के खातों से बड़ी रकम ठेकेदारों के खातों में भेजी गई थी और एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि ठेकेदारों के करीबी सहयोगियों के नाम पर चेक जारी कर नकदी निकाली गई या अन्य कंपनियों के जरिए फंड डायवर्ट किया गया। इस मामले में ईडी ने फरवरी में ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया था, हालांकि ईडी ने उन्हें इस मामले में अलग से गिरफ्तार नहीं किया था।

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