जमुई: जिले में पिछले एक महीने से भटक रहे 26 हाथियों के झुंड को वन विभाग ने सफलतापूर्वक उनके प्राकृतिक आवास झारखंड के जंगलों में वापस भेज दिया। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि न तो किसी इंसान को नुकसान हुआ और न ही किसी हाथी को।
वन विभाग की सतर्कता, बेहतर रणनीति और लगातार निगरानी के कारण यह चुनौतीपूर्ण अभियान पूरी तरह सफल रहा। झुंड 24 फरवरी 2026 को नवादा जिले के कौआकोल जंगल से भटकते हुए जमुई के हरखाड़, जन्मस्थान और गरही के वन क्षेत्रों में पहुंचा था। इस झुंड में 5 छोटे बच्चे भी शामिल थे, जिनमें एक नवजात हाथी भी था, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई थी।
पूरे प्रवास के दौरान हाथियों का यह समूह मुख्य रूप से गिद्धेश्वर पहाड़ी और पाठकचक डैम के आसपास के इलाकों में सक्रिय रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, एशियाई हाथी भोजन और पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं और अक्सर फसलों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बनती है।
👉 कैसे किया गया ऑपरेशन सफल?
24×7 निगरानी और ट्रैकिंग
रात में थर्मल ड्रोन से लोकेशन ट्रैक
सीमित मात्रा में ध्वनि, मशाल और पटाखों का उपयोग
बिजली विभाग के सहयोग से बिजली सप्लाई बंद कर सुरक्षा सुनिश्चित
वन विभाग ने बेहद संयम और संवेदनशीलता के साथ झुंड को धीरे-धीरे सुरक्षित दिशा में मोड़ते हुए झारखंड की ओर रवाना किया। यह अभियान मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है।
👉 बड़ी बात:
करीब एक महीने तक चले इस पूरे घटनाक्रम में किसी भी प्रकार की जन-धन हानि नहीं हुई, जो वन विभाग की कार्यकुशलता और समन्वय को दर्शाता है।

