डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: जब समंदर की लहरों पर युद्ध का साया हो और हर पल जान का खतरा बना रहे, तब अदम्य साहस ही जीत की राह बनाता है। खाड़ी देशों में जारी भारी तनाव और युद्ध की विभीषिका के बीच जमशेदपुर के अंश त्रिपाठी ने अपनी सूझबूझ से देश के लिए एक बड़ा मिशन पूरा किया है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का विशालकाय जहाज ‘शिवालिक’ 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित भारत लौट आया है।
मौत के रास्ते ‘होर्मुज’ को किया पार
दुनिया के सबसे खतरनाक और संवेदनशील समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को पार करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इंडियन ऑयल के लिए यूएई, कतर और सऊदी अरब से गैस लेकर आ रहे इस जहाज का नेतृत्व कैप्टन सुखमीत सिंह कर रहे थे, जिसमें अंश त्रिपाठी सेकंड इंजीनियर के तौर पर तैनात थे। जहाज के तकनीकी संचालन की पूरी कमान अंश के कंधों पर थी, जिन्होंने सुनिश्चित किया कि विषम परिस्थितियों में भी जहाज की सुरक्षा में कोई चूक न हो।
जब परिवार से टूटा संपर्क, थम गई थीं धड़कनें
जमशेदपुर के पारडीह (आशियाना वुडलैंड) में रहने वाले अंश के परिवार के लिए पिछला एक सप्ताह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। सफर के दौरान जब जहाज का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया, तो घरवाले अनहोनी की आशंका से सिहर उठे थे। पिता मिथिलेश कुमार त्रिपाठी (UCIL के सेवानिवृत्त उप-प्रबंधक) और माता चंदा त्रिपाठी लगातार सलामती की दुआएं कर रहे थे। टाटा स्टील में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत पत्नी चंदा मिश्रा त्रिपाठी ने बताया कि अब जहाज के गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने की खबर मिलने के बाद पूरे परिवार ने राहत की सांस ली है।
बिट्स मेसरा के छात्र रहे हैं अंश
शुरुआत से ही मेधावी रहे अंश त्रिपाठी की शिक्षा जमशेदपुर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल और AEIS नरवा से हुई है। उन्होंने BIT मेसरा से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और कोचीन शिपयार्ड से मरीन इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। साल 2014 से ही वे शिपिंग कॉर्पोरेशन के साथ जुड़कर देश की सेवा कर रहे हैं। वर्तमान में अंश के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। जमशेदपुर का यह ‘लाल’ अब न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए मिसाल बन गया है।

