डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। पाला बदलने का खेल शुरू हो चुका है और इसी कड़ी में भारतीय फुटबॉल के दिग्गज और पूर्व विधायक दीपेंदु विश्वास ने भाजपा का साथ छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया। दीपेंदु ने अपनी इस ‘घर वापसी’ को भावनाओं से जुड़ा फैसला बताया है।
क्यों छोड़ा था दीदी का साथ?
बता दें कि दीपेंदु विश्वास और तृणमूल के बीच खटास 2021 के विधानसभा चुनाव के समय आई थी। उस वक्त टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और भाजपा में शामिल हो गए थे। अब वापसी के बाद दीपेंदु ने कहा, ‘मेरा भाजपा के साथ जुड़ना महज एक भावनात्मक प्रतिक्रिया थी। मैंने कभी भी भाजपा के लिए जमीनी स्तर पर काम नहीं किया।’
भाजपा से दूरी और TMC से नजदीकी
दीपेंदु ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उल्टा सवाल दागा-‘क्या मुझे कभी भाजपा के किसी कार्यक्रम में देखा गया?’ सूत्रों की मानें तो दीपेंदु पिछले डेढ़ साल से भाजपा से दूरी बना चुके थे और उत्तर 24 परगना में टीएमसी के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रहे थे।
क्या फिर मिलेगा चुनाव में टिकट?
बसीरहाट दक्षिण से पूर्व विधायक रहे दीपेंदु से जब आगामी चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा फिलहाल मेरा लक्ष्य पार्टी के लिए काम करना है। टिकट को लेकर कोई बात नहीं हुई है। नेतृत्व मुझे जो भी जिम्मेदारी देगा, मैं उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।
सियासी सफर पर एक नजर
2014: बसीरहाट दक्षिण से उपचुनाव लड़ा, लेकिन मामूली अंतर से हार गए।
2016: इसी सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुंचे।
2021: टिकट न मिलने पर भाजपा में शामिल हुए।
2026: चुनाव से पहले फिर से ममता बनर्जी की टीम में वापसी।
अकेले नहीं लौटे दीपेंदु:
बसीरहाट जिला कार्यालय में आयोजित इस मिलन समारोह में सिर्फ दीपेंदु ही नहीं, बल्कि कांग्रेस, माकपा और भाजपा के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी तृणमूल में शामिल हुए। इसमें बसीरहाट के एक ब्लॉक स्तर के कांग्रेस पदाधिकारी का नाम भी शामिल है, जो इलाके में टीएमसी की पकड़ मजबूत होने का संकेत है।

