लालू यादव को सु्प्रीम कोर्ट से झटका, लैंड फॉर जॉब केस में FIR रद्द करने से इनकार, पेशी में राहत

Neelam
By Neelam
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राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चर्चित नौकरी के बदले जमीन घोटाले केस में अपने और परिवार के खिलाफ दर्ज FIR से जुड़ी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी।

जांच और ट्रायल जारी रहेगा

सुप्रीम कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ सीबीआई की ओर से दर्ज FIR और चार्जशीट को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने साफ किया कि इस मामले में जांच और ट्रायल जारी रहेगा।

सीबीआई की तरफ से पेश एएसजी ने दी ये दलील

सुनवाई के दौरान लालू यादव की तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी.राजू के बीच तीखी बहस हुई। सीबीआई की तरफ से दलील देते हुए एएसजी ने कोर्ट में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियमकी धारा 17A केवल उन मामलों में लागू होती है जहां संबंधित व्यक्ति निर्णय लेने वाला या सिफारिश करने वाला अधिकारी हो। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था इसलिए किसी पूर्व मंज़ूरी की जरूरत नहीं थी, क्योंकि लालू यादव ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पद का नहीं, बल्कि अपने निजी प्रभाव का इस्तेमाल करके फायदे उठाए थे।

चार्जशीट में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने का आरोप

वहीं, लालू यादव की तरफ से पेश हुए कपिल सिब्बल ने दलील दी कि 25 फरवरी 2025 को आखिरी चार्जशीट दायर कि गई है। जिसमें कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने मांग की कि चार्जशीट को ही रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह राजनीति से प्रेरित है।

व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मामले को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। लेकिन, लालू यादव की बढ़ती उम्र और बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देकर बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान लालू यादव को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं होगी। उनकी तरफ से उनके वकील पेश हो सकते हैं। यह राहत लालू यादव के लिए एक जीवनरेखा की तरह है, जो किडनी ट्रांसप्लांट के बाद सेहत से जुड़ी गंभीर दिक्कतों से जूझ रहे हैं।

क्या है मामला?

यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप डी नियुक्तियों में कथित धांधली से जुड़ा है, जहां नौकरी के बदले जमीन लेने के आरोप हैं। इस मामले में लालू यादव के साथ-साथ राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव पर भी आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया कि जमीन के बदले नौकरी का यह कथित मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ’ग्रुप डी’ नियुक्तियों से संबंधित है। अधिकारियों के अनुसार ये नियुक्तियां भर्ती किए गए लोगों द्वारा राजद प्रमुख के परिवार या सहयोगियों के नाम पर कथित तौर पर उपहार स्वरूप दी गई या हस्तांतरित की गई भूमि के बदले की गई थीं।

लालू प्रसाद यादव पर चार्जशीट हो चुकी है फाइल

आपको ये बता दें कि हाल ही में दिल्ली का राउज एवेन्यू की स्पेशन कोर्ट ने जनवरी 2026 में ही लालू प्रसाद यादव समेत बाकी आरोपियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। तब कोर्ट ने कहा था कि जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव, उनके परिवार के आरोपी सदस्यों और बाकी आरोपियों ने एक ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ की तरह काम किया। जमीन के बदले नौकरी घोटाले में राउज एवेन्यू की स्पेशल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव समेत 41 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे।

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