जमशेदपुर: शहर के सीतारामडेरा थाना अंतर्गत छायानगर में हुई भीषण गोलीबारी और चापड़बाजी मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपियों को उस वक्त धर दबोचा जब वे बस में सवार होकर पटना भागने की कोशिश कर रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि गिरफ्तार किए गए चारों अपराधियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पकड़े गए आरोपियों के में करण वर्मा, निर्भय सिंह उर्फ छोटका, कुणाल मुंडा, संतोष वर्मा है। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त एक पिस्तौल और तीन चापड़ भी बरामद कर लिए हैं।
क्या थी घटना?
यह पूरी वारदात 31 मार्च की रात की है। घायल नंदू लोहार के बयान के मुताबिक, वह अपने साथियों शनि पुष्टि और सुधीर बीन के साथ छायानगर सामुदायिक भवन के पास मौजूद था। तभी अचानक दर्जनों की संख्या में आए अपराधियों ने उन्हें घेर लिया।
ताबड़तोड़ फायरिंग: करण वर्मा ने नंदू की कनपट्टी पर पिस्तौल सटाकर गोली चलाई, जो उसकी गर्दन को छूती हुई निकल गई। दूसरी गोली अभिषेक उर्फ दतला ने मारी जो नंदू के हाथ में लगी।
चापड़ से हमला: जब गोलियां चलीं, तो अपराधियों ने चापड़ (धारदार हथियार) से भी हमला कर दिया। अभिषेक मुखी और अन्य ने शनि पुष्टि की पीठ पर चापड़ से वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
बाल-बाल बचे: सुधीर बीन पहली गोली चलते ही मौके से भागने में सफल रहा, जबकि नंदू और शनि को बाद में बस्ती वालों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
विवाद की जड़: छेड़खानी का विरोध और पुरानी रंजिश
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला अचानक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी।
28 मार्च की घटना: नंदू लोहार ने पुलिस को बताया कि 28 मार्च को आरोपी करण वर्मा ने उसकी बहन के साथ छेड़खानी की थी।
विरोध का बदला: जब नंदू और शनि पुष्टि ने इस हरकत का विरोध किया और करण के घर शिकायत करने गए, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इसी रंजिश का बदला लेने के लिए 31 मार्च को हथियारों के साथ हमला किया गया।
पुलिस की कार्रवाई
नंदू लोहार की शिकायत पर दर्ज प्राथमिकी में करण वर्मा, अभिषेक सिंह, पाल भुइयां, संजय भुइयां और मुन्ना समेत कई अन्य को नामजद किया गया था। पुलिस अब फरार चल रहे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

