डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने समाज की एकजुटता पर बड़ा संदेश दिया है। सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर परिसर में आयोजित तेली साहू समाज के 52वें राजिम महोत्सव में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए दास ने स्पष्ट कहा कि आज के युग में शक्ति ही सबसे बड़ी पहचान है।
‘संघे शक्ति कलियुगे’ का दिया मंत्र
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रघुवर दास ने शास्त्रोक्त कथन ‘संघे शक्ति कलियुगे’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कलयुग में संगठन ही शक्ति है। दुनिया केवल उन्हीं के सामने झुकती है जिनके पास सामर्थ्य और शक्ति होती है। समाज को अपनी एकता को ढाल बनाकर सामूहिक शक्ति को संजोना चाहिए।
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर
केवल संख्या बल ही नहीं, बल्कि बौद्धिक बल पर जोर देते हुए उन्होंने समाज से बच्चों के भविष्य पर निवेश करने की अपील की।
उनके संबोधन के मुख्य बिंदु
बौद्धिक विकास: समाज के बच्चे पढ़-लिखकर राजनीति और प्रशासन के शीर्ष पदों पर पहुँचें।
बेटियों को समान हक: बेटों की तरह बेटियों को भी उच्च शिक्षा के समान अवसर मिलें।
नारी शक्ति: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि नारी ही दो परिवारों में संस्कारों का बीजारोपण करती है। जब नारी सशक्त होगी, तभी देश आगे बढ़ेगा।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति का जमशेदपुर में संगम
रघुवर दास ने राजिम माता और कर्मा माता से प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति का यह उत्सव एक गौरवपूर्ण क्षण है, जो दो राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने का काम कर रहा है।

