डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: किताबी ज्ञान जब धरातल पर उतरता है, तो सीखने का अनुभव दोगुना हो जाता है। कुछ ऐसा ही अनुभव जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के एम.कॉम (सेमेस्टर-4) की छात्राओं को मिला। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. इला कुमार के मार्गदर्शन में छात्राओं के लिए एक विशेष औद्योगिक भ्रमण का आयोजन किया गया। वाणिज्य संकाय के सहयोग से आयोजित इस विजिट में छात्राओं ने आरएसबी (RSB) इंडस्ट्रीज की कार्यप्रणाली को करीब से समझा।
दो समूहों में बंटी छात्राएं, यूनिट-1 और यूनिट-3 का लिया जायजा
सीखने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए छात्राओं को दो समूहों में विभाजित किया गया था।
यूनिट-3: प्रोडक्शन से लेकर ग्लोबल प्रेजेंस तक
एचआर प्रमुख जया सिंह के सहयोग से छात्राओं ने कंपनी के विकास क्रम और उसके विशाल ‘कस्टमर बेस’ को समझा।
प्रोडक्ट नॉलेज: सविता कुमारी ने कंपनी के प्रमुख उत्पादों, जैसे— टैग एक्सल और लाइव एक्सल के बारे में तकनीकी जानकारी साझा की।
प्रेरणादायक इतिहास: छात्राओं को संस्थापक आर.के. बेहरा और एस.के. बेहरा के योगदान के बारे में बताया गया, जिन्होंने ‘इंटरनेशनल ऑटो प्रोडक्ट्स’ की नींव रखी थी।
लाइव डेमो: छात्राओं ने प्लांट के भीतर उपकरणों के कलपुर्जों से लेकर फाइनल प्रोडक्ट (एक्सल) बनने तक की पूरी प्रक्रिया देखी।
यूनिट-1: मैनेजमेंट और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
दूसरे समूह ने यूनिट-1 का भ्रमण किया, जहां प्लानिंग एचआर शुभा झा ने उन्हें कॉर्पोरेट जीवन की अपेक्षाओं और चुनौतियों से अवगत कराया।
सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर: दीपक ने औद्योगिक संरचना, आपातकालीन निकास और सुरक्षा उपायों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दी।
वित्तीय रुझान: रवि ने आरएसबी इंडस्ट्रीज के फाइनेंशियल ग्राफ, भविष्य की योजनाओं और विस्तार पर प्रकाश डाला।
पर्यावरण संरक्षण (ESG): छात्राओं को कंपनी की मियावाकी फॉरेस्ट परियोजना (वनीकरण पहल) के बारे में भी बताया गया, जो कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) का एक बेहतरीन उदाहरण है।
इनका रहा मार्गदर्शन
इस पूरे शैक्षणिक भ्रमण को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के डीन डॉ. दीपा शरण, विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी कुमारी, डॉ. छगनलाल अग्रवाल और डॉ. ग्लोरिया पूर्ति की अहम भूमिका रही। शिक्षकों के अनुसार, इस तरह के दौरों से छात्राओं में ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव क्षेत्रों में नवाचार के प्रति समझ विकसित होती है। छात्राओं ने इस अनुभव को अत्यंत महत्वपूर्ण और यादगार बताया, जिससे उन्हें ईवी प्रोजेक्ट्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग को समझने में मदद मिली।

