डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: लौहनगरी के सीतारामडेरा थाना अंतर्गत छायानगर में 31 मार्च की रात हुए खूनी संघर्ष ने गुरुवार को एक दर्दनाक मोड़ ले लिया। टाटा मुख्य अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे घायल युवक सन्नी पुष्टि की मौत हो गई। सन्नी की सांसें थमते ही परिजनों का सब्र टूट गया और अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
बहन की इज्जत बचाने की मिली खौफनाक सजा
इस पूरी वारदात की पटकथा 28 मार्च को ही लिख दी गई थी। घायल नंदू लोहार के बयान के मुताबिक मुख्य आरोपी करण वर्मा ने उसकी बहन के साथ बदतमीजी की थी। जब सन्नी और उसके साथी इसकी शिकायत करने करण के घर पहुंचे, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। 31 मार्च की रात जब सन्नी और उसके दोस्त सामुदायिक भवन के पास बैठे थे, तब आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से उन पर हमला बोल दिया।
वारदात का वो ‘ब्लैक आउट’ मंजर
चश्मदीदों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हमलावरों ने किसी पेशेवर अपराधी की तरह वार किया। करण वर्मा ने नंदू की कनपट्टी पर पिस्टल सटाई, लेकिन निशाना चूकने से गोली गर्दन को छूकर निकल गई। अभिषेक उर्फ दतला ने दूसरी गोली चलाई जो नंदू के हाथ में लगी। जब गोलियां चल रही थी, उसी वक्त अभिषेक मुखी ने नंदू के सिर पर चापड़ से हमला किया। दूसरी तरफ, संजय भुइयां और मुन्ना ने सन्नी पुष्टि को घेरकर चापड़ से गोद डाला। अंत में कुणाल मुंडा ने भागते हुए सन्नी की पीठ में गोली मार दी, जो उसके लिए जानलेवा साबित हुई।
पुलिस की कार्रवाई: भागने की फिराक में थे हत्यारे
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने बताया कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 4 मुख्य आरोपियों करण वर्मा, निर्भय सिंह, कुणाल मुंडा, संतोष वर्मा को मानगो बस स्टैंड से दबोच लिया है। उनके पास से 1 पिस्टल, 3 चापड़ भी बरामद किया गया। वहीं पुलिस अब अभिषेक सिंह, पाल भुइयां, संजय भुइयां, मुन्ना और अभिषेक मुखी की तलाश में छापेमारी कर रही है।
परिजनों की मांग: जब तक सभी की गिरफ्तारी नहीं, तब तक न्याय नहीं
सन्नी की मौत के बाद अस्पताल में परिजनों ने जमकर हंगामा किया। स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर छेड़खानी की शिकायत के बाद ही सख्त कार्रवाई होती, तो आज सन्नी जिंदा होता। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

