डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: टाटा स्टील के आवासों में रिटायरमेंट के बाद भी जमे रहने वाले पूर्व कर्मचारियों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। कंपनी की हाउस अलॉटमेंट कमेटी की हालिया बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब क्वार्टर खाली कराने के लिए कंपनी ‘सॉफ्ट’ रुख के बजाय सीधी और कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगी।
क्या है नया नियम?
कंपनी की नीति के अनुसार, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को क्वार्टर खाली करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाता है। इसके बावजूद, कई लोग लंबे समय तक आवास खाली नहीं कर रहे हैं। अब कंपनी ने यूनियन की सहमति से नियमों को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है।
मुख्य बदलाव और अहम बिंदु
सीधी कार्रवाई: अब बिना किसी लंबी प्रतीक्षा के अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
नए सख्त कानून: क्वार्टर खाली कराने की प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं।
लीगल खर्च से बचाव: कंपनी का मानना है कि क्वार्टर खाली कराने में होने वाले कानूनी खर्च और परेशानियों को कम करने के लिए नियमों को सिरे से बदलना जरूरी है।
54 नए हाउस अलॉटमेंट के प्रस्ताव
एचएसी की इस बैठक में केवल कड़ाई ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के हित में भी फैसले लिए गए। बैठक में कुल 54 हाउस अलॉटमेंट के प्रस्ताव लाए गए थे, जिनमें से 28 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। बाकी बचे हुए प्रस्तावों को फिलहाल पेंडिंग रखा गया है, जिन पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
बता दें कि टाटा स्टील प्रशासन अब आवास प्रबंधन को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। जहां एक ओर पात्र कर्मचारियों को नए आवास आवंटित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समय सीमा समाप्त होने के बाद भी क्वार्टर न छोड़ने वालों के खिलाफ अब सख्ती तय है।

