खाड़ी संकट की मार: टाटा स्टील की लागत ₹400 करोड़ बढ़ी, TV नरेंद्रन ने जताई वैश्विक युद्ध पर चिंता

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की आग अब भारतीय उद्योग जगत को झुलसाने लगी है। टाटा स्टील के सीईओ और एमडी टीवी नरेंद्रन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण टाटा स्टील की उत्पादन लागत में 400 करोड़ रुपये का बड़ा इजाफा हुआ है। नरेंद्रन बिष्टुपुर के माइकल जॉन सभागार में जेसीएपीसीपीएल श्रमिक यूनियन के 10वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

लागत बढ़ने के 3 मुख्य कारण
​वैश्विक अस्थिरता ने सप्लाई चेन को पूरी तरह प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कंपनी के खर्चो पर पड़ा है।
​कच्चे माल का आयात: कंपनी को कोयला और चूना पत्थर विदेशों से मंगाना पड़ता है, जो महंगा हो गया है।
​लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस: ‘फ्रेट वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ में 7 से 10 डॉलर तक की बढ़ोतरी हुई है।
​गैस संकट: युद्ध के कारण प्रोपेन और एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित हुई है।

टिनप्लेट पर ‘गैस संकट’ का साया
​एमडी ने बताया कि युद्ध के कारण टिनप्लेट कंपनी में प्रोपेन गैस की भारी किल्लत हो गई है।
​वर्तमान में स्थानीय स्तर पर टैंकरों की व्यवस्था कर जैसे-तैसे उत्पादन जारी है।
​कंपनी अब गैस के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर विचार कर रही है। कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बंद होने से कंपनी की कैंटीनों तक पर असर पड़ा है, जिसकी जानकारी केंद्र सरकार को दे दी गई है।

15,000 करोड़ का नया निवेश और भविष्य का रोडमैप
​चुनौतियों के बावजूद टाटा स्टील विस्तार की राह पर अडिग है। नरेंद्रन ने भविष्य की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला।
​भारी निवेश: इस साल भी कंपनी 15,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी।
​जमशेदपुर प्लांट की क्षमता: जमशेदपुर प्लांट में 11 मिलियन टन से अधिक उत्पादन संभव नहीं है, इसलिए अब ध्यान डाउनस्ट्रीम प्रोडक्ट्स (जैसे टिनप्लेट और कांबी मिल) पर केंद्रित किया जा रहा है।
​उपलब्धियां: कलिंगनगर में नई सुविधाओं की शुरुआत, लुधियाना में नया आर्क फर्नेस और जमशेदपुर में ‘जी ब्लास्ट फर्नेस’ की री-लाइनिंग के बावजूद उत्पादन लक्ष्य के अनुसार रहा है।

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