डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : टाटा स्टील के बोर्ड ने कंपनी की कार्यक्षमता बढ़ाने और कर्ज प्रबंधन को लेकर कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगा दी है। कंपनी ने न केवल अपनी सहायक इकाई नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड के खुद में विलय की घोषणा की है, बल्कि विदेशी बाजार और स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भी खजाना खोल दिया है।
नीलाचल इस्पात का टाटा स्टील में विलय
टाटा स्टील अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई NINL का अब खुद में विलय करने जा रही है। इसका उद्देश्य समूह की संरचना को सरल बनाना और परिचालन लागत में कमी लाना है। यह विलय कंपनीज एक्ट के तहत होगा और नियामक मंजूरियों के बाद प्रभावी होगा।
विदेशी बाजार के लिए ₹18,488 करोड़ का बड़ा दांव
कंपनी ने अपनी सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी टी स्टील होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (TSHP) में 2 अरब डॉलर (लगभग ₹18,488.10 करोड़) के निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश वित्त वर्ष 2026-27 से चरणों में इक्विटी शेयरों के जरिए किया जाएगा। इस भारी भरकम राशि का उपयोग विदेशी सब्सिडियरी कंपनियों के कर्ज भुगतान और उनके कामकाज को बेहतर बनाने में होगा।
मेडिका टीएस अस्पताल पर अब टाटा का पूर्ण अधिकार
टाटा स्टील ने स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सामाजिक जिम्मेदारी और पकड़ को बढ़ाते हुए मेडिका टीएस अस्पताल की 100% हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। कंपनी ₹1.49 करोड़ में मणिपाल हॉस्पिटल्स से शेष 49% इक्विटी और 31.85% प्रेफरेंस शेयर खरीदेगी। कलिंगनगर में स्थित यह अस्पताल अब टाटा स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई होगा, जिससे कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

