उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 को चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का विधिवत समापन हो गया। यह पर्व बिहार, झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।
लोक आस्था के इस पर्व में अंतिम दिन बिहार झारखंड के विभिन्न घाटों एवं नदी के तट पर भारी संख्या में व्रती महिलाएं और पुरुष उपस्थित हुए। सभी ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार के सुख-शांति, संतान की लंबी उम्र और निरोगी जीवन की कामना की।
चैती छठ व्रत को अत्यंत कठिन और नियम-संयम वाला व्रत माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की मंगल कामना और दीर्घायु के लिए किया जाता है। श्रद्धालु व्रतधारी चार दिनों तक विशेष नियमों का पालन करते हुए सूर्यदेव की आराधना करते हैं।
इस पर्व के समापन के साथ ही क्षेत्र में भक्ति और उल्लास का वातावरण रहा और श्रद्धालुओं ने व्रत पूर्ण होने पर एक-दूसरे को बधाई दी।