HomeUncategorizedवसुधैव कुटुंबकम्" का नारा संस्कृत साहित्य का ही अवदान है: डॉ महालिक

वसुधैव कुटुंबकम्” का नारा संस्कृत साहित्य का ही अवदान है: डॉ महालिक

जमशेदपुर । वर्कर्स महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से “संस्कृत साहित्य में मानव कल्याण” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग कोल्हान विश्वविद्यालय ,चाईबासा की अध्यक्षा डॉ अर्चना सिन्हा ने अपने वक्तव्य में वैदिक साहित्य एवं लौकिक साहित्य में निहित वैश्विक मानव कल्याण को उद्घाटित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य के हृदय में परोपकार ,दया ,विश्व बंधुत्व ,करुणा प्रेम ,वात्सल्य, सेवाभाव की अंतः सलिला प्रवाहित होती हैlयह विश्व मानव एवं संपूर्ण जीव जगत के कल्याण की कामना करती है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.सत्यप्रिय महालिक ने मुख्य वक्ता ,अतिथियों, महाविद्यालय के सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए वेबीनार के विषय की प्रासंगिकता को उल्लेखित किया तथा उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “वसुधैव कुटुंबकम्” का नारा संस्कृत साहित्य का ही अवदान है। विभागाध्यक्ष एवं वेबिनार की संयोजिका डॉ.लाडली कुमारी ने विषय प्रवेश कराते हुए वेबीनार का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस वेबिनार में अन्य महाविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी शामिल हुए। इंटरमीडिएट की संस्कृत व्याख्याता श्रीमती शिवानी सिट ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

Most Popular