मिरर मीडिया : धनबाद SNMMCH में
वेंटिलेटर न मिलने से एक नवजात ने दम तोड़ दिया। दरअसल, जिले के इस बड़े मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर कार्य में न होने पर डॉक्टरों ने परिवार जनों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी लेकिन परिजन नवजात को निजी अस्पताल में ईलाज कराकर पहले ही कंगाल हो चुके थें सो वहीं भर्ती कर दिया और वेंटिलेटर नही मिलने से बच्चे की जान चली गयी।
गोविन्दपुर थाना क्षेत्र के खिलकनाली गांव के निधु गिरी की विवाहिता बेटी ने सीएचसी गोविन्दपुर में एक शिशु को जन्म दिया। परिजनो के अनुसार चिकित्सक अथवा नर्स की लापरवाही के कारण बच्चा रोया नही।उसे सांस लेने में दिक्कत हुई तो निजी अस्पताल ले जाया गया वंहा ऑक्सिजन लगाया गया लेकिन सुधार न होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन चार दिन के ईलाज में परिजनों के सारे पैसे खत्म हो गए उसके बाद नवजात को SNMMCH में भर्ती कराया लेकिन वहां मौजूद एक मात्र वेंटिलेटर भी कार्यरत में नही था और बच्चे को रिम्स ले जाने के लिए रेफर किया जाता उससे पहले ही उसकी मौत हो गयी।अब परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और सरकार से गुहार लगाई है और मांग किया है कि जो घटना उसके बच्चे के साथ हुई और एक मां की गोद सुनी हो गयी वह किसी और के साथ ना हो इसलिए जल्द से जल्द एसएनएमसीएच में वेंटिलेटर की व्यवस्था कराई जाए।
वहीं इस मामले में अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि वेंटिलेटर की सुविधा उनके अस्पताल में है लेकिन सेंट्रल ऑक्सीजन पाइप लाइन से उसका कनेक्शन नहीं होने की वजह से अभी यह सुविधा बहाल ही नहीं हो पाई है, बहुत जल्द इस मसले का समाधान कर लिया जाएगा और बच्चों को वेंटिलेशन की सुविधा उपलब्ध हो जाएंगी इसके लिए सरकार से किसी अलग से फंड मांगने की आवश्यकता नहीं है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सरकार से अलग से किसी फंड की आवश्यकता नहीं है तो एसएमएमसीएच प्रबंधन द्वारा लंबे समय से इस प्रकार की लापरवाही क्यों की जा रही है , पाईप लाइन कनेक्शन के लिए इतना इंतजार क्यों किया जा रहा है क्यों नही इस समस्या को दूर किया जा रहा है क्या वेंटीलेटर के अभाव में ऐसे ही नवजात की जान जाति रहेगी । इस पर अस्पताल प्रबंधन के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग को भी एक बार जरूर गंभीर होकर विचार करने की जरूरत है।

