केंद्र सरकार ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक 2025 पेश कर दिया। राज्यसभा में इसे गुरुवार को पेश किया जाएगा। इस विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार इसे पारित कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, जबकि विपक्ष इसे असंवैधानिक बता रहा है। लोकसभा और राज्यसभा में इस पर 8-8 घंटे की चर्चा होगी।
एनडीए ने सांसदों को जारी किया व्हिप, सहयोगी दलों पर टिकी नजरें
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर विधेयक के समर्थन में वोट देने का निर्देश दिया है। एनडीए के प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), शिवसेना (शिंदे गुट) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास गुट) ने भी अपने सांसदों से सरकार के साथ रहने को कहा है।
हालांकि, सभी की निगाहें जेडीयू, टीडीपी और इंडिया गठबंधन के सहयोगी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) पर टिकी हैं। इन दलों का रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।
लोकसभा में हंगामे के बीच विधेयक पेश, विपक्ष ने की चर्चा का समय बढ़ाने की मांग
लोकसभा में बुधवार दोपहर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रश्नकाल के बाद वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक 2025 पेश किया। सरकार ने इस बिल पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया, लेकिन विपक्ष ने समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की। बिल पेश होने के दौरान सदन में विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया।
विधेयक पर सरकार का पक्ष और मुसलमानों को 5 भरोसे
सरकार ने विपक्ष और मुस्लिम समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए 5 प्रमुख आश्वासन दिए हैं—
- मस्जिदों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी – इस विधेयक का मस्जिदों या अन्य धार्मिक स्थलों से कोई संबंध नहीं है। यह केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ा विधेयक है।
- धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा – सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक स्थल या मस्जिद की व्यवस्था में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
- धार्मिक गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगेगी – वक्फ संपत्तियों को लेकर कोई विवाद हुआ तो उसका निपटारा वक्फ बोर्ड कानून के तहत किया जाएगा। सरकार मस्जिदों के संचालन में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
- सरकारी जमीन और विवादित संपत्तियों को देखने का अधिकार कलेक्टर को होगा – कोई भी वक्फ संपत्ति आदिवासी क्षेत्रों में नहीं बनाई जा सकेगी। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि किसी भी जमीन को लेकर विवाद ना हो।
- वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या सीमित रहेगी – केंद्र सरकार ने वादा किया है कि वक्फ काउंसिल में 22 में से केवल 4 सदस्य गैर-मुस्लिम होंगे। इसमें पूर्व अधिकारी और संसद के 3 सदस्य शामिल होंगे, जो किसी भी धर्म के हो सकते हैं।
बिल को लेकर क्या कह रहे हैं सरकार और विपक्ष?
किरेन रिजिजू ने संसद में बताया कि वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन को लेकर 97,27,772 याचिकाएं आई हैं, जो अब तक किसी भी बिल पर आई सबसे अधिक याचिकाएं हैं। 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग समितियों के सामने अपने विचार रखे हैं।
रिजिजू ने कहा कि यह विधेयक देश में वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। सरकार का मानना है कि यह बिल मुस्लिम समाज के हित में है, जबकि विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ बता रहा है।
अगले कदम
विधेयक को गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इसके पारित होने के लिए सरकार को जेडीयू और टीडीपी जैसे सहयोगी दलों के समर्थन की आवश्यकता होगी। विपक्ष इसे रोकने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। अब देखना होगा कि यह विधेयक संसद से पारित हो पाता है या नहीं।