रामगढ़ समाहरणालय में 6 अप्रैल 2026 को जारी ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश (ज्ञापांक 112) को लेकर दिनभर हलचल और चर्चाओं का दौर जारी रहा। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी की स्थापना शाखा द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए इस तबादले ने कर्मचारियों के बीच असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, बिना स्थापना समिति की बैठक किए इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग किया जाना नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। यही वजह है कि समाहरणालय परिसर से लेकर चौक-चौराहों तक इस फैसले को लेकर चर्चा का बाजार गर्म रहा।
कई कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ट्रांसफर प्रक्रिया में भारी असमानता देखने को मिली है। कुछ विभागों में एक ही जगह पर दो-दो बाबू की तैनाती कर दी गई है, जबकि कहीं एक भी कर्मी नहीं है। उदाहरण के तौर पर पतरातू अंचल में पहले से एक बड़ा बाबू कार्यरत था, इसके बावजूद दूसरे बड़े बाबू को प्रतिनियुक्त कर दिया गया। वहीं भू-अर्जन कार्यालय में भी पहले से पदस्थापित बाबू के रहते हुए दूसरे की नियुक्ति कर दी गई।
चितरपुर प्रखंड में पदस्थापित बड़े बाबू को चितरपुर अंचल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि चितरपुर अंचल से नाजिर का ट्रांसफर गोला कर दिया गया, जिससे वहां कोई बाबू या नाजिर नहीं बचा है—जबकि नियमतः कम से कम एक कर्मी का होना आवश्यक है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ कर्मी वर्षों से नजारत और परिवहन जैसे “मलाईदार” विभागों में जमे हुए हैं, और इस बार भी उन्हें वहीं बनाए रखने के लिए पदस्थापन के बजाय प्रतिनियुक्ति का सहारा लिया गया है। जिला परिवहन कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग में निम्न वर्गीय लिपिक की तैनाती को भी सवालों के घेरे में देखा जा रहा है, जिससे संभावित अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि इस पूरे मामले पर जिले के वरीय अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
फिलहाल, यह ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश प्रशासनिक गलियारों में चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है, और कर्मचारी अंदर ही अंदर नाराजगी जताते नजर आ रहे हैं।

