बुजुर्गों या माता पिता की देखभाल से मुंह मोड़ने पर हो सकती है छह माह की जेल और जुर्माना दोनों की सजा

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भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा बुजुर्गो को : कोई सेवा नहीं करता है तो फिर सरकार करेगी देखभाल

मिरर मीडिया : मौजूदा समय में देश में बुजुर्गों की कुल आबादी करीब 12 करोड़ है। इसके वर्ष 2050 तक करीब 33 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में सरकार समय रहते माता पिता और बुजुर्गों की देखभाल को लेकर सरकार भरण- पोषण से जुड़े सालों पुराने कानून में सख़्ती के साथ बड़े बदलाव की तैयारी में है। सूत्रों कि माने तो आने वाले समय में कोई व्यक्ति अब बुजुर्गों या माता पिता की देखभाल से मुंह नहीं मोड़ सकेगा। नहीं तो उसे छह माह की जेल और जुर्माना दोनों की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं इसके साथ ही बुजुर्गों को मिलने वाले गुजारा भत्ते में भी बदलाव की तैयारी है। हालांकि यह भत्ता बच्चों की हैसियत और उसकी आमदनी के हिसाब से निर्धारित होगी। अब तक इसका अधिकतम दायरा दस हजार रुपए प्रति माह ही प्रस्तावित किया गया था।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार माता-पिता अब सिर्फ अपने जैविक बच्चों से ही गुजारा भत्ता लेने के हकदार नहीं होंगे, बल्कि अब वह नाती-पोते, दामाद या फिर ऐसे संबंधी जो उनकी संपत्ति के दावेदार होंगे, उन सभी संबंधियों से वह गुजारा भत्ता मांग सकेगा।

आपको बता दें कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद माता-पिता व बुजुर्गों के भरण पोषण से जुड़े विधेयक में बदलाव को लेकर फिर से आगे बढ़ने की तैयारी में है। संसद के शीतकालीन सत्र में इसे लाने की पूरी तैयारी है।
विदित हो कि इस विधेयक को पहली बार वर्ष 2019 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन बाद में इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया। और कमेटी के सुझाव के बाद इस विधेयक में कई अहम बदलाव किए गए है।

बदलाव की तरफ नजर डाले तो अब बुजुर्गों को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। अगर कोई इनकी सेवा नहीं करता है तो फिर सरकार उनकी देखभाल करेगी। प्रत्येक जिलों में बुजुर्गों की मौजूदगी को मैपिंग करते हुए मेडिकल सुविधा युक्त वृद्धाश्रमों और जिला स्तर पर एक सेल गठित होगी। जो इससे जुड़ी सुविधाओं को संचालित करेगी। जबकि घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। प्रत्येक थाने में बुजुर्गों से जुड़े मामलों को देखने और उनका पूरा ब्यौरा रखने के लिए एक सब इंस्पेक्टर या फिर उसके समकक्ष रैंक का कोई पुलिस अधिकारी नामित होगा। जो थाना क्षेत्र में रहने वाले ऐसे प्रत्येक बुजुर्ग की एक सूची रखेगा। साथ ही उनकी देखरेख करने वाले लोगों और पड़ोसियों का भी ब्यौरा रखेगा।

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