धनबाद जंक्शन पर 6 अप्रैल को आयोजित गाड़ी संख्या 13379/13380 (धनबाद–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस) के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन, जनप्रतिनिधियों के अपमान और पूर्वनियोजित साजिश के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामले में सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता कृष्णा अग्रवाल ने रेलवे प्रशासन को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को लेकर पहले आमंत्रण भेजा गया, लेकिन कार्यक्रम के दिन ही उसे रद्द कर दिया गया, जो प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
क्या है पूरा मामला?
बताया गया कि 3 अप्रैल को जारी आमंत्रण पत्र के जरिए महापौर संजीव सिंह को कार्यक्रम में बुलाया गया था। लेकिन 6 अप्रैल को ही एक नया पत्र जारी कर आमंत्रण निरस्त कर दिया गया और कहा गया कि कार्यक्रम में केवल सांसद और विधायक ही शामिल होंगे।
इतना ही नहीं, प्रारंभिक बैनर में सांसद ढुल्लू महतो, विधायक राज सिन्हा, रागिनी सिंह और महापौर संजीव सिंह का नाम शामिल था। बाद में बैनर बदलकर केवल सांसद और एक विधायक का नाम ही रखा गया, जिससे विवाद और गहरा गया।
उठ रहे बड़े सवाल
अगर केवल सांसद और विधायक को ही बुलाना था, तो झारिया विधायक रागिनी सिंह का नाम क्यों हटाया गया?
क्या आमंत्रण सूची किसी आधिकारिक बैठक में तय हुई थी या व्यक्तिगत स्तर पर निर्णय लिया गया?
क्या किसी दबाव में आकर सूची और बैनर बदले गए?
जांच और माफी की मांग
कृष्णा अग्रवाल ने मांग की है कि:
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
दोनों पत्र जारी करने वाले अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए
48 घंटे के भीतर संबंधित अधिकारी महापौर और विधायक से लिखित माफी मांगें
आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो DRM कार्यालय के सामने बड़ा धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।
RTI से मांगी गई जानकारी
साथ ही सूचना का अधिकार (RTI) के तहत भी आवेदन देकर कार्यक्रम से जुड़े दस्तावेज, फाइल नोटिंग, बैनर बदलने के आदेश और प्रोटोकॉल गाइडलाइन की जानकारी मांगी गई है।

