डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: जमशेदपुर के चर्चित गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में हुई हत्या की गुत्थी अब पूरी तरह सुलझती नजर आ रही है। इस सनसनीखेज वारदात के मुख्य आरोपी और मृतक के सगे भाई अरविंद शर्मा ने देहरादून पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। अरविंद के सरेंडर के बाद अब इस हत्याकांड की एक-एक परत खुलने लगी है, जिसमें व्यापारिक रंजिश और वर्चस्व की कहानी सामने आई है।
क्यों हुई हत्या? 2 लाख का नुकसान और वर्चस्व की जंग
पुलिस जांच में यह बात साफ हुई है कि विक्रम शर्मा की हत्या के पीछे कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि उसके अपने भाई अरविंद और सहयोगी प्रभात की साजिश थी।
विवाद की जड़: प्रभात ने अरविंद शर्मा को मानगो (जमशेदपुर) स्थित एक घर में शरण दी थी। इस बात से विक्रम शर्मा काफी नाराज था।
आर्थिक चोट: नाराजगी में विक्रम ने प्रभात का ठेका छिनवाकर अपने करीबी को दिला दिया और उसका ‘बैचिंग प्लांट’ भी बंद करवा दिया।
साजिश: इस कार्रवाई से प्रभात को हर महीने होने वाली 2 लाख रुपये की आय बंद हो गई। इसी आर्थिक नुकसान का बदला लेने और इलाके में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए अरविंद और प्रभात ने मिलकर विक्रम की हत्या का प्लान तैयार किया।
सीसीटीवी से बेनकाब हुए शूटर
पुलिस ने तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तीन शूटरों की पहचान कर ली है। जिनमें आकाश प्रसाद, आशुतोष कुमार और विशाल शामिल है। जांच में पता चला है कि शूटर वारदात से पहले हरिद्वार रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में रुके थे। वहां से उन्होंने स्कूटी और बाइक किराए पर ली, जिससे वे देहरादून पहुंचे। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी वाहन वापस कर फरार हो गए।
जिम के बाहर बरसाई थीं गोलियां
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार सुबह करीब 10:40 बजे देहरादून में विक्रम शर्मा जैसे ही जिम से बाहर निकले, शूटरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शनिवार को देहरादून में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें जमशेदपुर से बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहुंचे थे।
पुलिस की अगली कार्रवाई
अरविंद शर्मा के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अब उसके साथी प्रभात और फरार तीनों शूटरों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। विक्रम की पत्नी सोनिया अभी गहरे सदमे में हैं, जबकि उनके करीबी मित्र अखिलेश सिंह की शिकायत पर डालनवाला थाने में मामला दर्ज है।

