डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : उत्तराखंड के बहुचर्चित विक्रम शर्मा हत्याकांड की जांच अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। देहरादून एसटीएफ की टीम ने जमशेदपुर के कई इलाकों में डेरा डाल दिया है। मानगो, बागबेड़ा और जुगसलाई जैसे क्षेत्रों में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी ने अपराधियों के बीच खलबली मचा दी है।
जांच में आए 3 बड़े मोड़: क्या है पूरा माजरा?
पुलिस की तफ्तीश में कुछ ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं।
दो शूटर, दो अलग रास्ते: जांच में सामने आया है कि हत्या को अंजाम देने के लिए दो शूटर अलग-अलग रास्तों से हरिद्वार पहुंचे थे। एक ने ट्रेन का रास्ता चुना, तो दूसरा हवाई मार्ग से पहुंचा। इससे पता चलता है कि हत्या की साजिश कितनी सोची-समझी थी।
भाई से संपत्ति विवाद? एसटीएफ ने विक्रम शर्मा के भाई अरविंद शर्मा से तीन दिनों तक कड़ी पूछताछ की। हालांकि, पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है, लेकिन पुलिस को भाईयों के बीच संपत्ति विवाद की जानकारी मिली है। फिलहाल, हत्या में उनकी संलिप्तता के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
मॉल में रेकी और सवा 10 का वो वक्त: घटना वाले दिन शूटरों ने सिल्वर सिटी मॉल के पास घंटों रेकी की थी। जैसे ही विक्रम शर्मा मॉल की सीढ़ियों से नीचे उतरे, उन्हें गोलियों से भून दिया गया। वारदात के बाद दोनों शूटर पैदल ही करीब 200 मीटर भागे और फिर पहले से खड़ी बाइक पर सवार होकर फरार हो गए।
दुमका जेल तक जुड़े हैं तार
एसटीएफ की रडार पर अब ‘गैंगस्टर अखिलेश सिंह’ का गिरोह भी है। सूत्रों की मानें तो पुलिस दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह से भी इस मामले में पूछताछ कर सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मर्डर के पीछे पुराने गैंगवार या दुश्मनी का हाथ हो सकता है।
एसटीएफ का बयान: उत्तराखंड एसपी एसटीएफ, अजय कुमार का कहना है कि अपराधियों की तलाश के लिए जाल बिछा दिया गया है। स्थानीय पुलिस की मदद से शूटरों और उनके मददगारों का पता लगाया जा रहा है। जल्द ही कातिल सलाखों के पीछे होंगे।
क्या कहती है पुलिस की थ्योरी?
शूटरों ने शहर में कदम रखने से पहले विक्रम शर्मा की दिनचर्या की पूरी जानकारी जुटाई थी। उन्होंने उनके जिम जाने के समय से लेकर घर के पास की लोकेशन तक की रेकी की थी। फिलहाल पुलिस उन सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है, जिनसे शूटरों के भागने के रूट का सटीक पता चल सके।

