क्या है वक्फ संशोधन विधेयक?
भारत सरकार ने हाल ही में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 लोकसभा में पारित किया है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में बड़े बदलाव लाने का प्रस्ताव करता है। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह मुस्लिम समुदाय के संपत्ति अधिकारों को कमजोर कर सकता है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
- वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति
- पहले वक्फ बोर्ड केवल मुस्लिम सदस्यों से मिलकर बनते थे।
- संशोधित विधेयक में गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी शामिल करने की अनुमति दी गई है।
- वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व की पुष्टि
- वक्फ बोर्डों को अपनी संपत्तियों के स्वामित्व के लिए जिला अधिकारियों से अनुमोदन प्राप्त करना होगा।
- यह प्रावधान ऐतिहासिक मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को प्रभावित कर सकता है।
- वक्फ संपत्तियों के प्रकारों में बदलाव
- ‘वक्फ बाय यूज़र’ (लंबे समय तक उपयोग के आधार पर वक्फ की मान्यता) की अवधारणा को हटा दिया गया है।
- ‘वक्फ-अलाल-औलाद’ (वंश समाप्त होने पर वक्फ संपत्ति का नियंत्रण) से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है।
विपक्ष और आलोचना
- कांग्रेस, AIMIM और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया है।
- विपक्ष का कहना है कि यह मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों को कमजोर करने और सरकार को उन पर अधिक नियंत्रण देने का प्रयास है।
- राहुल गांधी ने इसे संविधान पर हमला बताया और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
लोकसभा में पारित, अब राज्यसभा में अगली परीक्षा
- यह विधेयक लोकसभा में 288 मतों के समर्थन और 232 मतों के विरोध के साथ पारित हुआ।
- अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां यह कठिन परीक्षा का सामना कर सकता है।
- यदि राज्यसभा में भी पारित हो जाता है, तो इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना दिया जाएगा।