छठ महापर्व को यूनेस्को सूची में शामिल करने के क्या होंगे बड़े फायदे? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

KK Sagar
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बिहार और पूर्वांचल की पहचान बन चुका छठ महापर्व अब वैश्विक मान्यता की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने छठ को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसा होने पर छठ न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सांस्कृतिक प्रतीक बनेगा, बल्कि इसके कई बड़े फायदे भी होंगे।

यहां जानते हैं—अगर छठ महापर्व यूनेस्को सूची का हिस्सा बन जाता है, तो भारत और बिहार को क्या-क्या लाभ मिलेंगे?


⭐ 1. वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक पहचान को मजबूती

छठ को यूनेस्को का टैग मिलने पर यह दुनियाभर में एक आधिकारिक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जाना जाएगा।

बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

भारतीय प्रवासी समुदाय को गर्व और सांस्कृतिक मजबूती मिलेगी।


⭐ 2. बिहार में पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

यूनेस्को सूची में शामिल होने से दुनिया के कई देशों के पर्यटक छठ महापर्व को देखने भारत आएंगे।

गंगा घाट, तालाबों और छठ स्थलों पर पर्यटन गतिविधियाँ बढ़ेंगी।

इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, होटल उद्योग और परिवहन सेवाओं में तेजी आएगी।


⭐ 3. छठ संस्कृति और लोक परंपराओं का संरक्षण

यूनेस्को का दर्जा मिलने पर सरकार और विशेषज्ञ मिलकर—

लोकगीत, कला, चित्रकला, ‘कोसी भरना’, ‘अर्घ्य’ जैसे पारंपरिक तरीकों के संरक्षण पर काम करेंगे।

आने वाली पीढ़ियों के लिए छठ की परंपराएं सुरक्षित होंगी।


⭐ 4. पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

छठ महापर्व जल और प्रकृति से जुड़ा त्योहार है।

यूनेस्को सूची में आने के बाद सरकार और समाज जलाशयों, नदियों और घाटों की सफाई व संरक्षण पर अधिक ध्यान देंगे।

इससे पर्यावरण सुधार की दिशा में बड़ा फायदा होगा।


⭐ 5. अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक ताकत बढ़ेगी

भारत हमेशा से सांस्कृतिक धरोहरों का देश रहा है।

छठ के शामिल होने से भारत की Soft Power और सांस्कृतिक कूटनीति और मजबूत होगी।

दुनिया में भारतीय त्योहारों और परंपराओं की स्वीकृति बढ़ेगी।


⭐ 6. राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता को मजबूती

छठ अब केवल बिहार का त्योहार नहीं; आज यह

उत्तर प्रदेश

झारखंड

दिल्ली

महाराष्ट्र

और खाड़ी देशों सहित कई जगहों पर धूमधाम से मनाया जाता है।

यूनेस्को सूची में आने से यह राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक करीबियों को और मजबूत करेगा।


⭐ 7. आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा

छठ से जुड़े प्रसाद, मिट्टी के बर्तन, सूप, टोकरी, फल-फूल और सजावट वस्तुओं का बड़ा बाजार है।

यूनेस्को टैग मिलने से इन उत्पादों का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार बढ़ेगा।

कारीगरों, किसानों और स्थानीय व्यापारियों को सीधा लाभ होगा।

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