डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : जमशेदपुर की ऐतिहासिक इंकैब इंडस्ट्रीज (केबल कंपनी) को वेदांता के हाथों सौंपने के फैसले पर अब कानूनी तलवार लटक गई है। कर्मचारियों और EPFO ने कॉर्पोरेट जगत की इस बड़ी डील को चुनौती देते हुए मोर्चा खोल दिया है। कल यानी सोमवार, 9 फरवरी को दिल्ली में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के चेयरमैन की बेंच इस मामले पर निर्णायक सुनवाई करेगी।
विवाद की जड़: मजदूरों का पैसा या कॉर्पोरेट फायदा?
दरअसल, NCLT ने पहले ही 545 करोड़ में इंकैब इंडस्ट्रीज को वेदांता को सौंपने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। लेकिन पेंच फंसा है कर्मचारियों के हक पर।
164.63 करोड़ का बकाया: क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय जमशेदपुर के असेसमेंट के मुताबिक, कंपनी पर कर्मचारियों का 164.63 करोड़ PF बकाया है।
कर्मचारियों का तर्क: कर्मचारियों का कहना है कि वेदांता को सौंपे गए प्रोजेक्ट प्लान में उनके बकाये और भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
EPFO का स्टैंड: EPFO ने दलील दी है कि जब पूरी देनदारी तय हो चुकी है, तो कर्मचारियों के PF के हिस्से को अलग क्यों रखा गया? बिना इस राशि के भुगतान के कंपनी का टेकओवर गलत है।
क्यों अहम है कल की सुनवाई?
कल होने वाली सुनवाई केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का फैसला है। NCLAT को यह तय करना है कि क्या वेदांता को इस बकाये राशि का भुगतान करना होगा? क्या टेकओवर की शर्तों में बदलाव किया जाएगा? क्या कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर इस डील को आगे बढ़ाया जा सकता है?
खास बात यह है कि कर्मचारियों और EPFO ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिसे NCLAT ने स्वीकार कर लिया है। अब सबकी निगाहें नई दिल्ली की बेंच पर टिकी हैं।

