चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 19 मार्च 2026 से शुरू हुए इस नौ दिवसीय उत्सव का आज तीसरा दिन है, जो मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा को समर्पित है। इस दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना कर मां से सुख, शांति और साहस की कामना करते हैं।
🔶 मां चंद्रघंटा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से भय, तनाव और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। यह स्वरूप शक्ति और शांति का प्रतीक माना जाता है।
मां की कृपा से व्यक्ति को साहस, आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। माना जाता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव से विवाह के बाद देवी पार्वती ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया, जिससे उनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
🔶 पूजा विधि
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा इस प्रकार करें:
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें
घर के मंदिर में मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें
गंगाजल से शुद्धिकरण करें
मां को लाल फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें
दूध, खीर या मिठाई का भोग लगाएं
धूप और दीप जलाकर आरती करें
दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें
अंत में मां से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें
🔶 मां चंद्रघंटा का मंत्र
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
👉 “ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः”
या विस्तृत मंत्र:
👉 “पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥”
🔶 विशेष मान्यता
मां चंद्रघंटा की सवारी बाघिन है और उनकी 10 भुजाएं हैं, जिनमें वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। उनका स्वरूप भक्तों को शक्ति और निर्भयता का संदेश देता है।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और हर जगह भक्ति का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु उपवास रखकर मां की आराधना कर रहे हैं और जीवन में सुख-शांति की कामना कर रहे हैं।

