देवघर। गढ़वा के रमना प्रखंड की मानसिक रूप से अस्वस्थ किशोरी, जो 2011 में भटककर पश्चिम बंगाल के हावड़ा पहुंच गई थी, 14 साल बाद अपने परिवार से मिल गई। बाल कल्याण समिति, देवघर, चेतना विकास और चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रयासों से 25 सितंबर 2026 को उसे परिजनों को सौंपा गया।
हावड़ा से देवघर पहुंची किशोरी
2011 में हावड़ा बाल कल्याण समिति ने उसे बाल गृह में रखा था। वह अपना नाम-पता बताने में सक्षम नहीं थी। 2012 में उसे देवघर के बालिका गृह में स्थानांतरित किया गया, जहां इलाज और काउंसलिंग जारी रही।
उपचार से लौटी याददाश्त
लगातार उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ। उसने पहले पिता का नाम और फिर जिले व भाई-बहनों के नाम बताए। इससे परिवार की तलाश में अहम सुराग मिला।
खोजबीन के बाद मिला परिवार
बाल कल्याण समिति ने रमना थाना प्रभारी और स्थानीय मुखिया से संपर्क कर जानकारी का सत्यापन कराया। इसके बाद खोजबीन कर परिजनों का पता लगाया गया।
14 साल बाद परिवार से मिला मिलन
परिजनों ने बताया कि वर्षों तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने बेटी को मृत मान लिया था। उसके जीवित होने की खबर से परिवार में खुशी छा गई।
संस्थाओं के प्रयास से हुआ पुनर्मिलन
25 सितंबर 2026 को करीब 14 साल बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया। पुनर्मिलन में बाल कल्याण समिति, चेतना विकास, चाइल्ड हेल्पलाइन और रमना थाना के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

