प्रकाश पर्व दीपावली के भव्य और उल्लासपूर्ण अनुष्ठान की शुरुआत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि यानी ‘धनतेरस’ के साथ होती है। सनातन संस्कृति में यह पर्व केवल भौतिक सुख-सुविधाओं और धन-संपदा की प्राप्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आरोग्य और श्रेष्ठ स्वास्थ्य के संकल्प का सबसे बड़ा पावन अवसर माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी पवित्र तिथि पर भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। देवराज वैद्य और आयुर्वेद के प्रवर्तक के रूप में पूजनीय भगवान धन्वंतरि की कृपा से ही संसार को चिकित्सा विज्ञान और औषधियों का ज्ञान प्राप्त हुआ। यही कारण है कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की विशेष आराधना का विधान है।
धनतेरस पर क्यों है स्वास्थ्य का विशेष महत्व?
महर्षि धन्वंतरि की पूजा इस बात का प्रतीक “धनतेरस का पर्व हमें याद दिलाता है कि धन-संपत्ति जीवन को सुविधाजनक बना सकती है, लेकिन स्वस्थ शरीर और
है कि जीवन में धन और वैभव तभी सार्थक हैं जब शरीर स्वस्थ और निरोगी हो। आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तताओं के बीच यह पर्व हमें ‘पहला सुख निरोगी काया’ के प्राचीन भारतीय दर्शन की याद दिलाता है। आयुर्वेद और चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों के लिए यह दिन अत्यंत प्रेरणादायी होता है, क्योंकि यह हमें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दिशा में नए संकल्प लेने का अवसर देता है।
इस पर्व के प्रमुख अनुष्ठान और परंपराएं
• आरोग्य के देवता की वंदना: भगवान धन्वंतरि के समक्ष दीप प्रज्वलित कर परिवार के प्रत्येक सदस्य के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
• धन और वैभव की आराधना: माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा से घर में सुख, शांति, स्थिर लक्ष्मी और आर्थिक संपन्नता का आगमन होता है।
• शुभ खरीदारी की परंपरा: इस दिन सोना, चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन, आभूषण या नए सामान खरीदने की परंपरा है, जिसे घर में बरकत का प्रतीक माना जाता है।
• यम दीपदान का विधान: संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार पर मंडराने वाला अकाल मृत्यु का भय और संकट दूर होते हैं।
• स्वच्छता और दीपोत्सव: मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों की साफ-सफाई कर दीप जलाए जाते हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
धनतेरस का असली संदेश
भौतिकता की अंधी दौड़ में अक्सर हम अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। धनतेरस हमें यह यथार्थ सिखाता है कि स्वस्थ शरीर ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। इस पावन अवसर पर केवल कीमती वस्तुओं की खरीदारी ही नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, स्वच्छता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने और खुद को व अपने परिवार को निरोगी रखने का संकल्प लेना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता को पूर्ण करता है।

