बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (बीएसईबी) द्वारा आयोजित मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के नतीजों का इंतजार खत्म होने वाला है। बीएसईबी की ओर से जल्द ही मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। इससे पहले मैट्रिक और इंटरमीडिएट टॉपर्स की वेरीफिकेशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिहार बोर्ड हर साल रिजल्ट जारी करने से पहले संभावित टॉपर्स को पटना ऑफिस में बुलाकर उनका वेरीफिकेशन करता है।
मार्च के आखिरी हफ्ते में जारी हो सकता है रिजल्ट
बिहार बोर्ड 12वीं की परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी तक और 10वीं की 17 फरवरी से 25 फरवरी तक हुई थी। अब बिहार बोर्ड अपनी परंपरा को कायम रखते हुए इस साल भी देश के अन्य शिक्षा बोर्ड की तुलना में सबसे पहले रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है। बिहार बोर्ड मैट्रिक का रिजल्ट मार्च के आखिरी हफ्ते में जारी होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच किसी भी समय नतीजों का ऐलान किया जा सकता है।
टॉपर वेरिफिकेशन के बाद जारी होगा रिजल्ट
फिलहाल बिहार बोर्ड टॉपर्स का फिजिकल वेरिफिकेशन चल रहा है, जिसके पूरा होते ही रिजल्ट की तारीख घोषित कर दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार, संभावित टॉपर्स की कॉपियों की विभिन्न जिलों में दोबारा जांच की जा रही है। बोर्ड संभावित टॉपर्स को वेरिफिकेशन के लिए बुलाता है, जहां उनका पैनल इंटरव्यू भी लिया जाता है। इस दौरान उनसे उनके विषयों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य परिणाम में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता से बचना होता है। टॉपर वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ही बोर्ड रिजल्ट जारी करता है।
क्यों होता है टॉपर्स का फिजिकल वेरिफिकेशन?
बिहार बोर्ड में टॉपर्स वेरिफिकेशन की परंपरा कुछ साल पहले शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। अतीत में कुछ विवादों के बाद, बोर्ड ने यह सुनिश्चित करने का फैसला किया कि जो छात्र मेरिट लिस्ट में आ रहे हैं, वे वास्तव में उन अंकों के हकदार हैं। इस प्रोसेस से यह पुष्टि होती है कि छात्र ने खुद परीक्षा लिखी है और उसे अपने विषयों का बेसिक नॉलेज है। यह कदम फर्जीवाड़े को रोकने और मेधावी छात्रों को उचित सम्मान दिलाने के लिए उठाया जाता है।
वेरिफिकेशन प्रक्रिया में क्या-क्या होता है?
जब कॉपियों की चेकिंग के बाद ‘पोटेंशियल टॉपर्स’ की लिस्ट तैयार हो जाती है, तो उन्हें पटना स्थित बिहार बोर्ड मुख्यालय बुलाया जाता है। यहां 4 स्टेप्स में जांच होती है-
हैंडराइटिंग का मिलान
सबसे पहले छात्र की हैंडराइटिंग चेक की जाती है। इससे यह क्लीयर होता है कि परीक्षा छात्र ने ही दी है, किसी और ने नहीं।
सब्जेक्ट एक्सपर्ट द्वारा लिया जाता है इंटरव्यू
विभिन्न विषयों के एक्सपर्ट्स की एक कमेटी छात्र से सवाल पूछती है। ये सवाल उनके सिलेबस से ही होते हैं ताकि उनकी समझ को परखा जा सके।
ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव प्रश्न
छात्रों से कुछ ओरल और रिटेन सवाल भी हल करवाए जा सकते हैं।
पर्सनैलिटी टेस्ट
यह एक सामान्य बातचीत जैसा होता है, जिससे छात्र के आत्मविश्वास का पता चलता है।

