रामगढ़ के माता वैष्णो देवी मंदिर का 35वां वार्षिकोत्सव कलश यात्रा के साथ शुरू

KK Sagar
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शहर में गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य कलश यात्रा, जय माता दी के जयकारों से गूंजा रामगढ़

रामगढ़। शहर के झंडा चौक स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर का 35वां वार्षिकोत्सव शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुआ। गाजे-बाजे के साथ निकाली गई इस कलश यात्रा में शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया और चारों ओर “जय माता दी” के जयकारे गूंजते रहे।

कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु महिलाएं लाल चुनरी ओढ़े सिर पर कलश लेकर कतारबद्ध होकर चल रही थीं। यात्रा की शुरुआत मंदिर परिसर से हुई, जो झंडा चौक, गांधी चौक, मेन रोड, सुभाष चौक, शिवाजी रोड, लोहार टोला होते हुए चट्टी बाजार स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर पहुंची। वहां कलश में जल भरकर श्रद्धालु पुनः मंदिर लौटे।

यात्रा के दौरान एक सुसज्जित वाहन पर माता का विशाल चित्र रखा गया था। वाहन के पीछे रामगढ़ के प्रसिद्ध भजन गायक कमल बगड़िया और ध्रुव सिंह अपनी टीम के साथ भजन गाते हुए चल रहे थे। श्रद्धालु महिलाएं भी माता के जयकारे लगाते हुए पूरे जोश और श्रद्धा के साथ नगर भ्रमण करती रहीं।

नगर भ्रमण के दौरान शिवाजी रोड स्थित गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के सदस्यों ने कलश यात्रा का स्वागत किया। वहीं, शतचंडी यज्ञ के मुख्य यजमान हर्ष आनंद एवं उनकी पत्नी निशु आनंद भी यात्रा में आगे-आगे साथ चल रहे थे।

इस अवसर पर मंदिर की संचालक संस्था पंजाबी हिन्दू बिरादरी एवं माता वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरत चन्द्र वासुदेव, महासचिव महेश मारवाह, उपाध्यक्ष मनजीत साहनी, सहसचिव नरेश चन्द्र मारवाह, सुभाष चन्द्र मारवाह, जे.के. शर्मा, सुरेन्द्र सोबती, ओमकार मल्होत्रा, राजीव चड्डा, बलवंत राय मारवाह, वेद आनंद, संजीव चड्डा, अजीत अग्रवाल, मनीष मारवाह, विशाल वासुदेव, पवन मारवाह, हरिओम भसीन, प्रवीण शर्मा सहित बिरादरी के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

बताया गया कि आज से 35 वर्ष पूर्व झंडा चौक स्थित इस मंदिर में माता की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिमा स्थापना के समय एक अद्भुत और आश्चर्यजनक घटना भी घटी थी। लोगों ने प्रतिमा को नियत स्थान पर स्थापित करने का प्रयास किया, लेकिन प्रतिमा उठ नहीं पाई। इसके बाद काशी व अन्य स्थानों से आए पंडितों द्वारा अनुष्ठान किए गए, फिर एक तेज आवाज और धरती में कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद प्रतिमा नियत स्थान पर स्थापित हो सकी। लोगों का कहना है कि उस आवाज को पूरे रामगढ़वासियों ने सुना था।

हर वर्ष प्रतिमा स्थापना की वर्षगांठ पर वार्षिकोत्सव मनाया जाता है। वहीं मंदिर ट्रस्ट द्वारा वर्ष में तीन बार भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। मंदिर के गुंबद को लगभग 30 फीट तक सोने से मढ़ा गया है, वहीं मंदिर के ऊपर सोने का छत्र भी बनाया गया है।

वार्षिकोत्सव के पहले दिन की कलश यात्रा ने शहर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का नया माहौल बना दिया।

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