8वें वेतन आयोग पर एआईआरएफ का सशक्त हस्तक्षेप: पुराने पेंशन की बहाली समेत कई बड़े मुद्दे रखे केंद्र के सामने

KK Sagar
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धनबाद। केंद्र सरकार के साथ संयुक्त परामर्शदात्री समिति की राष्ट्रीय परिषद की 15 नवंबर को हुई महत्वपूर्ण बैठक में सरकारी कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई प्रमुख मुद्दों को एआईआरएफ (ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन) ने बेबाकी से उठाया। यह बैठक नवगठित 8वें वेतन आयोग के लिए संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी। सरकारी कर्मचारियों की नीतियां निर्धारित करने वाले सबसे बड़े संगठन के रूप में संयुक्त परिषद एवं एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।

ईसीआरकेयू की ओर से जानकारी देते हुए एआईआरएफ के जोनल सेक्रेटरी ओ. पी. शर्मा ने बताया कि शिव गोपाल मिश्रा ने 3 नवंबर को वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी करने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद तो दिया, लेकिन संदर्भ की शर्तों पर कड़ा विरोध जताते हुए कर्मचारियों के हितों से जुड़ी अपनी प्रमुख मांगें जोरदार तरीके से रखीं। इन मांगों को प्रधानमंत्री तक भी भेजा गया है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

एआईआरएफ की प्रमुख मांगें

✔ 01.01.2004 के बाद नियुक्त रक्षा, रेलवे और पैरामिलिट्री कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) में शामिल किया जाए।
✔ 69 लाख पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग के दायरे में लाया जाए।
✔ पेंशन पर ‘अनफंडेड वित्तीय बोझ’ जैसे शब्दों को संदर्भ शर्तों से हटाया जाए।
✔ 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 01.01.2026 से हर हाल में लागू हों।
✔ वेतन और पेंशन दोनों में 20% अंतरिम राहत तुरंत दी जाए।
✔ कम्युटेशन पेंशन की अवधि 15 वर्ष से घटाकर 11 वर्ष की जाए।

ईसीआरकेयू मीडिया प्रभारी एन. के. खवास ने बताया कि बैठक के बाद एआईआरएफ द्वारा देशभर की सभी जोनल यूनियनों, जिसमें ईसीआरकेयू भी शामिल है, को निर्देश दिया गया है कि न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, भत्ते, एमएसीपी समेत 40 से अधिक मुद्दों पर विस्तृत सुझाव एवं प्रस्ताव 15 दिसंबर तक फेडरेशन कार्यालय भेजें, ताकि जल्द से जल्द मेमोरेंडम तैयार कर सरकार एवं आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे में ईसीआरकेयू के महामंत्री एस. एन. पी. श्रीवास्तव एवं उसकी कोर कमेटी ने मेमोरेंडम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे कर्मचारियों की अपेक्षाओं और हितों को पूरी मजबूती से रखा जा सके।

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