छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रहा डीजीपी और आईजीपी का 60वां वार्षिक सम्मेलन आज रविवार को अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसके साथ तीन दिवसीय बैठक का औपचारिक समापन होगा। सम्मेलन की शुरुआत शुक्रवार को हुई थी, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया था।
पहले दो दिनों में गहन विचार-विमर्श
शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन की बैठक की अध्यक्षता की और भारत की सुरक्षा प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की। पीएम ने कहा कि यह मंच “सुरक्षा क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को साझा करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है।”
सम्मेलन में शामिल प्रमुख शख्सियतों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका, सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद, केंद्रीय व राज्य पुलिस बलों के शीर्ष प्रतिनिधि और लगभग 600 अधिकारी शामिल हैं।
अमित शाह के उद्घाटन संबोधन में सुरक्षा की नई दिशा
उद्घाटन भाषण में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने
नक्सलवाद,
पूर्वोत्तर की चुनौतियाँ,
जम्मू-कश्मीर की स्थिति
का “स्थायी समाधान” निकाला है और देश में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या तेजी से कम हुई है। उन्होंने सभी पुलिस प्रमुखों से नशीले पदार्थों और संगठित अपराध के खिलाफ आक्रामक अभियान चलाने, खुफिया सूचनाओं की सटीकता बढ़ाने और अंतर-एजेंसी तालमेल मजबूत करने पर जोर दिया।
‘विकसित भारत : सुरक्षा आयाम’ — मुख्य विषय
सम्मेलन का उद्देश्य ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप ‘सुरक्षित भारत’ के रोडमैप तैयार करना है।
चर्चा के मुख्य बिंदु —
✔ वामपंथी उग्रवाद
✔ आतंकवाद-रोधी रणनीति
✔ साइबर सुरक्षा
✔ आपदा प्रबंधन
✔ महिला सुरक्षा
✔ पुलिसिंग में फोरेंसिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग
इस बार युवा दृष्टिकोण को शामिल करने के लिए पहली बार बड़ी संख्या में DIG और SP स्तर के अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है।
लाल किले विस्फोट के संदर्भ में सुरक्षा चुनौती पर फोकस
सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पिछले सप्ताह ही सुरक्षा एजेंसियों ने 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में शामिल ‘सफेदपोश आतंकवादी मॉड्यूल’ का भंडाफोड़ किया था। इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति और भविष्य की कार्य योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई है।
सम्मेलन स्थलों की परंपरा में बदलाव
2014 के बाद से सम्मेलन अब दिल्ली के बजाय अलग-अलग राज्यों में आयोजित किया जाता है। इससे पहले यह आयोजन
गुवाहाटी, कच्छ, हैदराबाद, टेकनपुर, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, पुणे, लखनऊ, जयपुर, भुवनेश्वर और एक बार फिर दिल्ली में हो चुका है। इस बार रायपुर को मेजबानी मिली है।
आज की बड़ी उम्मीद
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समापन संबोधन में आगामी वर्षों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के प्रमुख निर्देश और प्राथमिकताओं का ऐलान होने की संभावना है। पूरा देश इस बात पर नज़र बनाए हुए है कि ‘विकसित भारत’ की दिशा में सुरक्षित भारत की संरचना किस रूप में आगे बढ़ेगी।

