क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी, जहां हरक्यूलिस से उतरे पीएम मोदी 

Reena Sharma
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चीन सीमा के करीब देश की सामरिक शक्ति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) को राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। पीएम मोदी ने यहां भारतीय वायुसेना के बाहुबली विमान C-130J सुपर हरक्यूलिस से सीधे हाईवे स्ट्रिप पर लैंड किया। इसके बाद उन्होंने यहां फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर का हवाई प्रदर्शन (एयर शो) देखा।

हाईवे स्ट्रिप पर दिखा वायुसेना का दम

इस दौरान राफेल, सुखोई-30 MKI, C-130J सुपर हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, डोर्नियर सर्विलांस विमान एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ये सभी जेट हाईवे स्ट्रिप पर सफलतापूर्वक उतरे और उड़े। इसके अलावा हेलीकॉप्टरों से घायलों को निकालने (कैजुअल्टी इवैक्यूएशन) की भी प्रैक्टिस की गई।

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रणनीतिक रूप से काफी अहम

इस इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी को पूर्वोत्तर भारत की रक्षा और रणनीतिक तैयारी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। असम के ऊपरी हिस्से में डिब्रूगढ़-मोरान बाइपास पर राष्ट्रीय राजमार्ग 127 का 4.2 किलोमीटर लंबा हिस्सा खास तौर पर इस तरह तैयार किया गया है कि जरूरत पड़ने पर सड़क को कुछ ही समय में रनवे में बदला जा सके।

सामरिक दृष्टि से खास है ये ईएलएफ

बता दें कि देशभर में 28 ईएलएफ की योजना है। फिलहाल असम को छोड़कर देश में ऐसे पांच जगह ऐसी सुविधा है। असम में यह सुविधा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चीन सीमा के काफी पास है। जो कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत-चीन सीमा से महज 300 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित यह सुविधा न केवल सैन्य दृष्टि से अहम है, बल्कि आपदा और आपात स्थितियों में भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।

क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी? 

दरअसल, ईएलएफ यानी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी युद्ध और आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे की सुविधा है। जहां हाईवे पर पट्टी बनाई जाती है। जो कि युद्ध या आपातकाल में लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टरों के लिए वैकल्पिक लैंडिंग की जगह देती है। ईएलएफ 40 टन तक के फाइटर विमान और 74 टन तक के अधिकतम टेक-ऑफ भार वाला परिवहन विमान को संभालने में सक्षम है।

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