राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर के मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के मामले पर सुनवाई टाल दी है। स्पेशल जज विशाल गोगने ने मामले की 15 दिसंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वो इस मामले के सभी आरोपियों के संबंध में विस्तृत वेरिफिकेशन रिपोर्ट दाखिल करें।

अगली सुनवाई 15 दिसंबर को
कथित जमीन के बदले नौकरी (लैंड-फॉर-जॉब) घोटाले के केस में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, परिवार के अन्य सदस्यों सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए सुनवाई एक बार फिर टाल दी है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के बाद विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है।
सीबीआई ने आरोपियों के वेरिफाई के लिए समय मांगा
पिछली सुनवाई के दौरान 8 दिसंबर को सीबीआई ने कथित नौकरी के बदले जमीन घोटाले में विभिन्न आरोपियों की स्थिति वेरिफाई करने के लिए समय मांगा था। 8 दिसंबर को कोर्ट को बताया गया था कि इस मामले के कुछ आरोपियों की मौत हो चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को आरोपियों की मौत का वेरिफिकेशन कर कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें।
दो बार मामले में सुनवाई टली
इससे पहले, दो बार मामले में की सुनवाई टल चुकी है। पहले 4 दिसंबर और 10 नवंबर को कोर्ट किसी न किसी वजह से फैसला टाल चुका है। कोर्ट ने सीबीआई के मामले में आरोप तय करने पर 25 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
लालू-राबड़ी समेत तेजस्वी और मीसा भी आरोपी
7 अक्टूबर, 2022 को लैंड फॉर जॉब मामले में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था। ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। सीबीआई ने 7 जून, 2024 को इस मामले में अंतिम चार्जशीट दाखिल किया था, जिसमें 78 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन 78 आरोपियों में से रेलवे में नौकरी पाने वाले 38 उम्मीदवार भी शामिल हैं।
जमीन देने वालों को रेलवे में ग्रुप ‘डी’ पदों पर नौकरियां
लैंड-फॉर-जॉब घोटाला 2004 से 2009 के बीच तब हुआ था जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। सीबीआई का आरोप है कि इस दौरान लालू के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर जमीनें खरीदी गईं। यह जमीनें बाजार भाव से कम कीमत पर और ज्यादातर नकद में ली गईं। इसके बदले में जमीन देने वालों को रेलवे में ग्रुप ‘डी’ पदों पर नौकरियां दी गईं।

