बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए भारत ने मंगलवार को वहां तैनात भारतीय अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है। यह कदम बांग्लादेश में होने वाले संसदीय चुनाव से कुछ सप्ताह पहले एहतियातन उठाया गया है।
सुरक्षा स्थिति को देखते हुए एहतियाती कदम
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार,
“सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए उच्चायोग और अन्य पदों पर तैनात भारतीय अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी गई है।”
हालांकि, सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश में भारत का मिशन पूरी तरह से सक्रिय है। ढाका स्थित उच्चायोग के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारतीय राजनयिक और अधिकारी अपने-अपने पदों पर कार्यरत हैं।
अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि राजनयिकों और अन्य अधिकारियों के परिवार किस समय भारत लौटेंगे।
बांग्लादेश को ‘गैर-पारिवारिक’ गंतव्य घोषित
सूत्रों की मानें तो बांग्लादेश में चरमपंथी तत्वों की बढ़ती गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर भारत ने इसे भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के लिए ‘गैर-पारिवारिक’ गंतव्य घोषित करने का निर्णय लिया है।
गौरतलब है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान पहले से ही भारतीय राजनयिकों के लिए गैर-पारिवारिक गंतव्य की सूची में शामिल है।
राजनीतिक बदलाव के बाद बिगड़े संबंध
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव देखा जा रहा है।
भारत लगातार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जताता रहा है।
गंगा जल समझौते पर तेज हुई कवायद, बिहार के लिए राहत की उम्मीद
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल वितरण से जुड़े 1996 के समझौते को नए सिरे से लागू करने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। इस बीच बिहार के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है।
बिहार को मिल सकता है 900 क्यूसेक पानी
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्तावित समझौते में यह संभावना जताई जा रही है कि शुष्क मौसम के दौरान बिहार को लगभग 900 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पानी का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल आपूर्ति और औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
2026 में समाप्त होगा पुराना समझौता
गौरतलब है कि गंगा जल बंटवारे को लेकर 1996 में किया गया समझौता 12 दिसंबर 2026 को अपनी तय अवधि पूरी कर लेगा। इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पहले ही एक आंतरिक समिति का गठन कर दिया है।
समिति की अंतिम रिपोर्ट में शुष्क मौसम के दौरान बिहार को 900 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की अनुशंसा की गई है, जिसे राज्य के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

