बिहार सरकार ने राज्य में कॉल सेंटर, वित्तीय सेवाओं, अकाउंटिंग और परामर्शदाता राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के केंद्र स्थापित करने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बिहार वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) नीति-2026 को मंजूरी दे दी है।
पटना में 29 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार के औद्योगिक कायाकल्प के लिए दो क्रांतिकारी नीतियों को मंजूरी दी गई है। राज्य कैबिनेट ने “बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026” और “बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी-2026” पर अपनी मुहर लगा दी है। इन नीतियों का मुख्य उद्देश्य बिहार को तकनीक और निवेश के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना और यहां के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। बैठक में कुल 32 एजेंडों पर अपनी सहमति दी गई।
देश में सबसे अधिक सब्सिडी का वादा
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने बताया कि सेमीकंडक्टर एक बेहद तकनीकी और पूंजी प्रधान क्षेत्र है। इसमें निवेश की संभावनाएं हजारों करोड़ रुपये तक जाती हैं, जो ₹1,000 करोड़ से लेकर ₹10,000 करोड़ तक हो सकती हैं। केंद्र सरकार के “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन” के साथ कदम मिलाते हुए बिहार सरकार ने अब तक की सबसे आकर्षक नीति तैयार की है।
निवेशकों को 50 करोड़ की सब्सिडी
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की सेमीकंडक्टर नीति देश में सबसे बेहतरीन है और सरकार बिहार में निवेश करने वाले निवेशक को 50 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी देगी।
बिहार के युवाओं को मिलेगा रोजगार
कुंदन कुमार ने कहा कि इसके साथ ही बिहार के स्थानीय युवाओं को रोजगार देने पर कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। सचिव ने कहा कि नवाचार और उन्नत प्रौद्योगिकी के केंद्र के रूप में जीसीसी की स्थापना भारत को वैश्विक ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जीसीसी नीति-2026 का मुख्य उद्देश्य उन्नत अनुसंधान और औद्योगिक विकास के एकीकरण के माध्यम से एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जिससे सतत विकास एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।

