डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: मानगो की राजनीति में आज एक अलग ही नजारा देखने को मिला। तामझाम, शोर-शराबे और शक्ति प्रदर्शन की परंपरा को दरकिनार करते हुए सुधा गुप्ता ने बेहद सादगी के साथ मानगो नगर निगम के मेयर पद के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
अपनत्व की झलक: जब पूर्व मंत्री ने खुद खोला कार का गेट
नामांकन की शुरुआत भावुक और पारिवारिक रही। घर से निकलने से पहले सुधा गुप्ता ने पूजा-अर्चना कर ईश्वर का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने खुद कार का दरवाजा खोलकर उन्हें बिठाया और जीत की शुभकामनाओं के साथ विदा किया। यह सादगी और सम्मान की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी रही।
मंदिरों में टेका मत्था, मांगा मानगो का कल्याण
सुधा गुप्ता ने चुनावी रण में उतरने से पहले आध्यात्मिक आशीर्वाद को प्राथमिकता दी। उन्होंने कदमा स्थित रंकनी मंदिर और मानगो के बड़ा हनुमान मंदिर में मत्था टेका। उन्होंने प्रार्थना की कि मानगो की जनता को सुख, सम्मान और एक उज्ज्वल भविष्य मिले।
गुलदस्ते जैसा जनसमर्थन: प्रस्तावक बने हर समाज के प्रतिनिधि
सुधा गुप्ता के नामांकन की सबसे बड़ी खासियत उनका ‘सर्वसमाज’ चेहरा रहा। उनके प्रस्तावक के रूप में समाज के हर वर्ग की मौजूदगी ने इसे ‘जन-जन का नामांकन’ बना दिया।
मुस्लिम समाज: डॉ. मोहम्मद जकारिया (बुद्धिजीवी)
सिख समाज: भगवान सिंह (प्रधान, मानगो गुरुद्वारा)
ब्राह्मण समाज: बिपिन झा
वैश्य समाज: भगवान प्रसाद व लीला गुप्ता (पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, रौनियार वैश्य महा सभा)
ईसाई समाज: डेविड पूर्ति
विश्वकर्मा समाज: राजेश शर्मा
जनता को जाम से बचाना मेरी प्राथमिकता
उनसे जब भीड़ और रैली की कमी पर सवाल किया, तो सुधा गुप्ता ने परिपक्वता भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सादगी ही मेरी पहचान है। मानगो में फ्लाईओवर का काम तेजी से चल रहा है, सड़कें संकीर्ण हैं। अगर मैं हजारों की भीड़ जुटाती, तो जनता को भारी जाम से जूझना पड़ता। लोगों को तकलीफ देकर मैं अपनी राजनीति की शुरुआत नहीं करना चाहती थी।
नामांकन के बाद सुधा गुप्ता भावुक नजर आई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए यह चुनाव महज एक पद की प्राप्ति नहीं है, बल्कि मानगो की हर बेटी, मां और परिवार के हक की लड़ाई है। उन्होंने जनता के प्यार और विश्वास को ही अपनी असली ताकत बताया।

