डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल इस वक्त एक बड़े प्रशासनिक और चिकित्सकीय संकट से जूझ रहा है। महज एक महीने के भीतर अस्पताल के विभिन्न विभागों से 23 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने न केवल अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
अनुशासन का ‘डोज’ पड़ा भारी?
अस्पताल के गलियारों में चर्चा है कि यह भगदड़ प्रबंधन द्वारा बढ़ाई गई सख्ती का नतीजा है। दरअसल, पिछले काफी समय से जूनियर डॉक्टरों के ड्यूटी से गायब रहने और समयपालन की अनदेखी की शिकायतें मिल रही थी। इसके बाद प्रशासन ने अटेंडेंस रजिस्टर और शिफ्ट व्यवस्था की निगरानी कड़ी कर दी। जैसे ही गैरहाजिर डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया और जवाबदेही तय की गई, इस्तीफों की झड़ी लग गई।
प्रबंधन का मानना है कि जो डॉक्टर ड्यूटी को लेकर गंभीर नहीं थे, उन्होंने दबाव बढ़ते ही पद छोड़ना बेहतर समझा। हालांकि, कुछ डॉक्टरों का तर्क है कि उन्होंने उच्च शिक्षा और करियर के बेहतर अवसरों के लिए यह कदम उठाया है।
इन विभागों में मचा है सबसे ज्यादा हाहाकार
इस्तीफों का सबसे गहरा असर सर्जरी और एनेस्थीसिया जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर पड़ा है। सर्जरी विभाग से डॉ. सौरव कुमार, डॉ. हरिशंकर सिंह, डॉ. स्वीटी, डॉ. सिमोना और डॉ. अनुराग सिंह ने विदा ली है। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. संदीप, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. युवराज, डॉ. जितेंद्र और डॉ. नगरिश के जाने से ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है।
मेडिसिन विभाग की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां डॉ. सहगुप्ता सहीन, डॉ. अफशाना, डॉ. रूपम षारंगी, डॉ. जावेरी और डॉ. मुस्कान ने इस्तीफा दे दिया है। नेत्र विभाग से डॉ. जीतू, डॉ. नीतू, डॉ. शेखर और आशीष कुमार बाहर हो गए हैं। इनके अलावा स्त्री रोग विभाग से डॉ. प्रगति व डॉ. सुनिमा, मनोरोग विभाग से डॉ. सौम्या भारती और शिशु रोग विभाग से डॉ. पी. उड़ाव ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
क्या होगा मरीजों का?
एक साथ इतने डॉक्टरों के जाने से एमजीएम की ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं पर असर पड़ना तय है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुटा है। वरिष्ठ डॉक्टरों की शिफ्ट में बदलाव किया जा रहा है और अतिरिक्त काम का बोझ मौजूदा स्टाफ पर डाला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या सीमित संसाधनों के बीच यह अस्थायी व्यवस्था मरीजों को सही इलाज दे पाएगी?

