लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किये गए संकल्प पर 12 घंटे से अधिक समय की चर्चा हुई। सरकार की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे मतदान के लिए सदन के समक्ष रखा। सदन ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, ध्वनिमत से संकल्प को अस्वीकृत कर दिया।
संसद के नियम किसी भी व्यक्ति से सर्वोपरि-ओम बिरला
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद आज पहली बार आसन पर आए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है और नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।
मैं पार्लियामेंट के सभी सदस्यों का आभारी- ओम बिरला
अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि “वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए।” ओम बिरला ने बताया कि “सदन में पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक बहस हुई, ताकि सभी सदस्यों के विचार और चिंताएं सामने आ सकें। उन्होंने कहा “यह सदन 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। यहां हर सांसद अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं के साथ आता है।”
हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे-ओम बिरला
इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि”मैंने हमेशा कोशिश की कि हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे। सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है।” बिरला ने कहा कि “पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी।” उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े।

