दक्षिण-पूर्व रेलवे का बड़ा फैसला: अब सभी मेमू ट्रेनों में लोको पायलट के साथ होंगे सहायक, सुरक्षा होगी पुख्ता

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: दक्षिण-पूर्व रेलवे ने रेल परिचालन और यात्री सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब जोन की सभी मेमू ट्रेनों में केवल एक नहीं, बल्कि लोको पायलट के साथ सहायक लोको पायलट की नियुक्ति भी अनिवार्य कर दी गई है। रेलवे मुख्यालय की साप्ताहिक बैठक में उच्च स्तरीय कमेटी ने इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी है।

दूरी की पाबंदी खत्म, सुरक्षा सर्वोपरि
पुराने नियमों के अनुसार, कम दूरी तय करने वाली मेमू ट्रेनों का परिचालन केवल एक लोको पायलट के भरोसे होता था। दो पायलट (लोको पायलट और सहायक) केवल उन्हीं ट्रेनों में भेजे जाते थे जिनकी दूरी 200 किलोमीटर या उससे अधिक होती थी। ‘ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन’ लंबे समय से इस नियम का विरोध कर रहा था। संगठन का तर्क था कि दूरी चाहे कितनी भी हो, सुरक्षा के लिहाज से दो क्रू मेंबर्स का होना अनिवार्य है।

हादसे से लिया सबक
इस फैसले के पीछे 4 नवंबर, 2025 को दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में हुई एक गंभीर दुर्घटना का भी संदर्भ है। वहां एक मेमू ट्रेन खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। हालांकि उस ट्रेन में दो पायलट मौजूद थे, लेकिन रेलवे का मानना है कि इस नए निर्णय से लोको पायलटों पर काम का मानसिक दबाव कम होगा और तकनीकी निगरानी पहले से बेहतर हो सकेगी। अलारसा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘रेल सुरक्षा की जीत’ बताया है।

टाटानगर में तीन दिवसीय सेफ्टी कैंप प्रशिक्षण
इसी कड़ी में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों के कौशल को निखारने के लिए टाटानगर लोको ट्रेनिंग सेंटर में तीन दिवसीय सेफ्टी कैंप प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। खास बात यह है कि पहले यह प्रशिक्षण अवधि छह दिनों की होती थी, जिसे अब रेलवे ने घटाकर तीन दिन कर दिया है ताकि प्रशिक्षण प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

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