मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा एसआइआर विवाद से लेकर चुनावों में लगातार पक्षपाती रूख अपनाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया है। राज्यसभा के करीब 73 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ नया प्रस्ताव पेश किया है।
बंगाल और तमिलनाडु ऐतिहासिक मतदान के बीच नोटिस
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अबतक के ऐतिहासिक मतदान के बीच विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की अपनी मुहिम की नई सिरे से शुरुआत की है। इसके लिए 13 विपक्षी दलों के 73 राज्यसभा सांसदों ने शुक्रवार को सीईसी को उनके पद से हटाए जाने के लिए ताजा नोटिस दिया है।
ताजा नोटिस में 9 नए आरोप
विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 9 नए आरोप भी लगाए गए हैं। इस बार विपक्ष ने ‘सिद्ध दुराचार’ (के आधार पर हटाने का प्रस्ताव रखते हुए 9 नए आरोप जोड़े हैं। इससे पहले इसी महीने लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए ऐसे ही नोटिस स्पीकर और सभापति द्वारा खारिज कर दिए गए थे।
प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री के इशारे पर काम करने का आरोप
ताजा नोटिस राज्यसभा के महासचिव को सौंपा गया है, जिसमें विपक्ष का कहना है कि नए तथ्यों और आरोपों के आधार पर इस मामले पर पुनर्विचार जरूरी है। राष्ट्रपति को संबोधित इस नोटिस में सीईसी पर नौ आरोप लगाते हुए उनके कामकाज को शर्मनाक बताते हुए दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के शीर्ष संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ वे प्रधानमंत्री तथा गृहमंत्री के इशारे पर काम कर रहे हैं और इसलिए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
इन पार्टी के सांसदों ने किए हस्ताक्षर
बंगाल में एसआइआर पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सियासी मैदान में जारी संग्राम के बीच बीते डेढ़ महीने में ज्ञानेश कुमार को घेरने के लिए विपक्षी दलों ने दूसरी बार महाभियोग प्रस्ताव को हथियार बनाने का दांव चला है। विपक्ष के नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले राज्यसभा सांसदों की पार्टियां हैःकांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), जेएमएम, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, नेशनल कॉन्फ्रेंस, आम आदमी पार्टी।
पहले भी लाया जा चुका है प्रस्ताव
बता दें कि इससे पहले 12 मार्च को 63 राज्यसभा सांसदों और 130 लोकसभा सांसदों ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव दिया था। देश के इतिहास में यह पहली बार बीते 12 मार्च को सीईसी के खिलाफ महाभियोग का नोटिस संसद के दोनों सदनों में दिया गया था। हालांकि 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबूतों की कमी बताते हुए इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।

