रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने ब्याज दरों यानी रेपो रेट की घोषणा कर दी है। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक में ब्याज दरों को लेकर यह फैसला लिया गया।
रेपो रेट 5.25% वही रहेगा
गवर्नर ने बताया कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी अभी रेपो रेट 5.25% ही रहेगा। रेपो रेट में बदलाव न होने से आपकी ईएमआई पर कोई असर असर होगा। वहीं होम लोन, पर्सनल लोन आदि की ब्याज दरें भी पहले जितनी रहेंगी।
ब्याज दरों में बदलाव नहीं
केंद्रीय बैंक का यह फैसला पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच मुद्रास्फीति (महंगाई) और आर्थिक विकास को लेकर उसकी सतर्कता को दर्शाता है। इससे पहले अप्रैल में हुई नीतिगत समीक्षा बैठक में भी आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, ताकि भू-राजनीतिक हालातों, ईंधन की कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर इसके असर की बारीकी से निगरानी की जा सके।
क्या है रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है, जिस ऐसा आरबीआई कमर्शियल बैकों को लोन देता है। जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैकों को आरबीआई से मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है। ऐसे में वे इसका बोझ ग्राहकों पर डालते हैं। वे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे सभी लोन्स पर ब्याज दरों को बढ़ा देते हैं। आरबीआई महंगाई में कमी लाने के लिए बाजार में लिक्विडिटी घटाता है। ऐसा वह रेपो रेट बढ़ाकर करता है।
जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.6% किया
मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी जाहिर कीं। उन्होंने साफ कहा कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका है, और उत्पादन लागत बढ़ने का दबाव अब अर्थव्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर कमजोर मांग और उच्च लॉजिस्टिक लागत के कारण भारत के वस्तु निर्यात के सामने भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन तमाम विपरीत वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का आकलन करते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।

