बंदूक नहीं, अब तकनीक से लैस होंगे RPF जवान: टाटा नगर में अपराधियों की डिजिटल घेराबंदी, पर यात्रियों के डेटा का क्या?

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: आने वाले समय में टाटानगर रेलवे स्टेशन पर कदम रखते ही आपकी पहचान चुटकियों में सत्यापित हो जाएगी। स्टेशन के रिडेवलपमेंट प्लान के साथ-साथ इसकी सुरक्षा को भी स्मार्ट बनाया जा रहा है। अब आरपीएफ के जवान पारंपरिक हथियारों के बजाय अत्याधुनिक डिजिटल टूल्स से लैस नज़र आएंगे। इनमें सबसे प्रमुख है- फिंगरप्रिंट और आइरिस (पुतली) स्कैन सिस्टम। इस नई व्यवस्था के तहत स्टेशन पर किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को रोका जा सकता है। जवान उसके फिंगरप्रिंट या आइरिस को एक पोर्टेबल डिवाइस से स्कैन करेंगे। यह जानकारी तुरंत नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम और क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन डेटाबेस से मिलाई जाएगी। मिलान होते ही व्यक्ति का पूरा आपराधिक इतिहास कुछ ही पलों में सामने आ जाएगा।

रेलवे प्रशासन का दावा है कि इस कदम से स्टेशन पर अपराधों में भारी कमी आएगी। दक्षिण-पूर्व रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि स्टेशन का विस्तार हो रहा है, यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में सुरक्षा को चाक-चौबंद करना ज़रूरी है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर यात्री की यात्रा सुरक्षित हो। इसके लिए आरपीएफ जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एक तकनीकी टीम चौबीसों घंटे तैनात रहेगी ताकि सिस्टम सुचारू रूप से काम कर सके।

मुख्य प्रवेश द्वार के अलावा बर्मामाइंस गेट की भी सुरक्षा व्यवस्था को इसी तकनीक से लैस किया जाएगा। लेकिन इस अभेद्य सुरक्षा योजना के साथ ही निजता से जुड़ी चिंताएं भी उभर कर सामने आई हैं। डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का सवाल है कि क्या इस तरह की व्यापक स्कैनिंग आम नागरिकों को बिना वजह संदिग्ध नहीं बना देगी? क्या रेलवे के पास लाखों यात्रियों का बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित रखने की क्षमता है? हालांकि रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह से सुरक्षा के दायरे में है।

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